राजस्थान के भीलवाड़ा के नवनीत शर्मा ने कठिन परिस्थितियों और मां से किए वादे को अपनी ताकत बनाया। दो प्रयासों में RAS परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर वह SDM बने और संघर्ष, मेहनत व आत्मविश्वास की मिसाल पेश की।
RAS Success Story: राजस्थान के भीलवाड़ा के नवनीत शर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत किसी भी मुश्किल को मात दे सकते हैं। ICU में भर्ती मां से किया गया एक वादा उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया और उसी संकल्प ने उन्हें RAS परीक्षा में शानदार सफलता दिलाकर SDM की जिम्मेदारी तक पहुंचाया।
छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले नवनीत शर्मा बचपन से पढ़ाई में मेधावी रहे। उनका सपना पहले IIT में दाखिला लेने का था, लेकिन समय के साथ उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया। उनका मानना था कि अधिकारी बनकर वे समाज और परिवार दोनों के लिए कुछ बड़ा कर सकते हैं। परिवार ने भी हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और यही समर्थन उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

स्कूल की पढ़ाई में भी नवनीत का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने राजस्थान बोर्ड की 10वीं कक्षा में 96 प्रतिशत और 12वीं में 94.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने BSc-BEd की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य RAS अधिकारी बनना ही था।
बिना कोचिंग की तैयारी और संघर्ष का दौर
नवनीत ने RAS की तैयारी बिना किसी कोचिंग के शुरू की। वह रोजाना लाइब्रेरी में घंटों पढ़ाई करते, किताबों, मॉक टेस्ट और सेल्फ स्टडी के जरिए अपनी तैयारी मजबूत करते रहे। इस दौरान कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया और कहा कि केवल घर पर पढ़कर प्रशासनिक सेवा में सफलता पाना आसान नहीं है।
हालांकि उन्होंने आलोचनाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से दिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपना फोकस कभी नहीं खोया और लगातार तैयारी जारी रखी।
ICU में मां से किया वादा बना सबसे बड़ी प्रेरणा
तैयारी के दौरान नवनीत के जीवन में सबसे कठिन समय तब आया, जब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार होकर लगभग चार महीने तक अस्पताल में भर्ती रहीं। परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा था और हर कोई चिंतित था।
इसी दौरान ICU में उन्होंने अपनी मां का हाथ पकड़कर कहा, "अभी रुको, आपको अपने बेटे को कलेक्टर बनते देखना है।" यह सिर्फ भावनात्मक पल नहीं था, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प बन गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई की रफ्तार और बढ़ा दी और रोजाना 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करने लगे।
पहले प्रयास में सफलता, दूसरे प्रयास में शानदार रैंक
लगातार मेहनत का परिणाम उन्हें पहले प्रयास में भी मिला। वर्ष 2023 की RAS परीक्षा में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उनका चयन तहसीलदार पद के लिए हुआ। लेकिन नवनीत का लक्ष्य इससे बड़ा था। उन्हें लगता था कि मां से किया गया वादा अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है।
इसी सोच के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और RAS 2024 में ऑल इंडिया नहीं बल्कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा की मेरिट में रैंक-3 हासिल कर शानदार सफलता दर्ज की। इस उपलब्धि के बाद उन्हें SDM के पद के लिए चयनित किया गया।
सफलता का संदेश
नवनीत शर्मा की कहानी बताती है कि सफलता केवल संसाधनों पर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, अनुशासन और निरंतर प्रयास पर निर्भर करती है। उन्होंने साबित किया कि छोटे शहर से आने वाला छात्र भी बड़े सपने देखकर उन्हें सच कर सकता है।
उनकी यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों, पारिवारिक चुनौतियों या असफलताओं के कारण अपने लक्ष्य से भटक जाता है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सफलता एक दिन जरूर मिलती है।













