अमेरिका ने ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की, ट्रम्प बोले- हर हमले का 20 गुना जवाब देंगे

अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। ट्रम्प ने कड़ा संदेश दिया, जबकि तेल कीमतों में उछाल और मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से वैश्विक चिंता गहरा गई

अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर नई एयरस्ट्राइक की, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी हमले का जवाब अमेरिका 20 गुना अधिक ताकत से देगा।

ईरान/अमेरिका वॉर: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर नई हवाई कार्रवाई करते हुए बुशहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक और कोनारक सहित कई अहम क्षेत्रों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य क्षमता और परिचालन प्रभाव को कमजोर करना था।

हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका पर दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब "20 गुना अधिक ताकत" के साथ दिया जाएगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान बातचीत और समझौता चाहता है, लेकिन उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं कि तेहरान किसी समझौते का पालन करेगा।

करीब 90 सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा

अमेरिकी सेना ने बताया कि हालिया अभियान में ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन लक्ष्यों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन स्टोरेज, नौसैनिक अड्डे, तटीय निगरानी केंद्र और सैन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाएं शामिल थीं। CENTCOM का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज क्षेत्र में जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई। अमेरिका का आरोप है कि हाल के सप्ताहों में ईरान समर्थित गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।

ट्रम्प का सख्त संदेश, समझौते पर जताया अविश्वास

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने संपर्क कर समझौते की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं कि ईरान किसी भी समझौते का ईमानदारी से पालन करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और सहयोगी देशों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यदि अमेरिकी हितों पर हमला हुआ तो जवाब पहले से कहीं अधिक कठोर होगा।

ईरान का जवाबी दावा

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देना था। हालांकि बहरीन और कुवैत के अधिकारियों ने केवल एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए जाने और चेतावनी सायरन बजने की पुष्टि की है। दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि हमलों के पीछे कौन था या कितना नुकसान हुआ।

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तेल बाजार पर दिखा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 78.80 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 74.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कुछ तेल टैंकरों ने अपनी निर्धारित यात्रा में बदलाव किया है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बहरीन और खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट

अमेरिकी हमलों के बाद बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने अपने सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय स्थित है, इसलिए क्षेत्र में किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। कुवैत में भी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए।

खामेनेई परिसर पर हमले का दावा

ईरान ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि हालिया अमेरिकी-इजराइली हमलों में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आधिकारिक परिसर के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे हमलों से देश के राजनीतिक और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अमेरिका ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होती है, तो तेल आयात, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक जारी सैन्य तनाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकता है।

आगे क्या?

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मिडिल ईस्ट को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला दिया है। दोनों पक्षों के तीखे बयानों और जवाबी कार्रवाइयों से तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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