Neeraj Chopra: मोटापे से जूझने वाला लड़का बना ओलंपिक चैंपियन, जानिए ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा की प्रेरणादायक कहानी

Neeraj Chopra: मोटापे से जूझने वाला लड़का बना ओलंपिक चैंपियन, जानिए ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा की प्रेरणादायक कहानी

भारतीय खेल इतिहास में जब भी सबसे महान एथलीट्स की बात होगी, नीरज चोपड़ा का नाम हमेशा शीर्ष पर रहेगा। भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) में भारत को पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज आज करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। 

Neeraj Chopra Birthday: भारतीय ओलंपिक इतिहास के सबसे महान एथलीटों की बात की जाए तो नीरज चोपड़ा का नाम शीर्ष पर शामिल होता है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में नीरज ने भारत के लिए भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह एथलेटिक्स में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में नीरज चोपड़ा ने रजत पदक अपने नाम किया। 

वह व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण और रजत दोनों पदक जीतने वाले इकलौते भारतीय एथलीट हैं। साथ ही वह भाला फेंक में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी भी हैं। ‘गोल्डन बॉय’ के नाम से मशहूर नीरज चोपड़ा आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं और 28 वर्ष के हो गए हैं।

हरियाणा के किसान परिवार से ओलंपिक पोडियम तक

नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन में नीरज बेहद शांत स्वभाव के थे, लेकिन उनका सबसे बड़ा संघर्ष था मोटापा। 12 साल की उम्र तक उनका वजन 80 किलो से ज्यादा हो गया था। घर में दादी के हाथ का घी, चूरमा और मक्खन उनकी कमजोरी थी। स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे, जिससे नीरज काफी परेशान रहने लगे।

नीरज के चाचा ने उनकी परेशानी को समझा और उन्हें वजन कम करने के लिए स्टेडियम में दौड़ लगाने ले जाने लगे। यहीं से नीरज की जिंदगी ने नया मोड़ लिया। स्टेडियम में उन्होंने पहली बार खिलाड़ियों को भाला फेंकते देखा और उन्हें यह खेल बेहद रोमांचक लगा। कहा जाता है कि नीरज ने पहली ही कोशिश में लगभग 25 मीटर दूर भाला फेंक दिया, जिसने कोच और खिलाड़ियों को चौंका दिया।

नीरज के चाचा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें खुद नहीं पता चला कि नीरज कब गंभीर खिलाड़ी बन गया। जब लोकल अखबार में इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता जीतने की फोटो छपी, तब परिवार को एहसास हुआ कि नीरज में असाधारण प्रतिभा है।

जूनियर स्तर से विश्व मंच तक

नीरज ने 2012 में लखनऊ में आयोजित नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 68.40 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता और नेशनल रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 2016 अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 86.48 मीटर का थ्रो कर न केवल गोल्ड जीता, बल्कि विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया। यहीं से नीरज चोपड़ा वैश्विक एथलेटिक्स मानचित्र पर उभरकर सामने आए।

हालांकि 2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में वे 15वें स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने हार से सीख ली। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपनी वापसी का ऐलान कर दिया।

टोक्यो ओलंपिक: इतिहास का सुनहरा पल

टोक्यो ओलंपिक 2020 (आयोजित 2021) में नीरज चोपड़ा भारत की सबसे बड़ी उम्मीद थे। मुकाबले में जर्मनी के स्टार एथलीट जोहान्स वेटर भी थे, जिनका पर्सनल बेस्ट 97 मीटर से ज्यादा था। लेकिन दबाव के उस क्षण में नीरज ने शानदार संयम दिखाया और 87.58 मीटर का थ्रो कर भारत को ओलंपिक इतिहास का पहला एथलेटिक्स गोल्ड दिलाया। वे भाला फेंक में ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई एथलीट बने।

  • 2022: डायमंड लीग फाइनल जीता
  • 2023: विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने
  • 2024 पेरिस ओलंपिक: सिल्वर मेडल अपने नाम किया

इस तरह नीरज चोपड़ा व्यक्तिगत ओलंपिक इवेंट में गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले इकलौते भारतीय एथलीट बन गए। 2024 में नीरज ने अपने करियर में पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार किया। दोहा डायमंड लीग में उन्होंने 90.23 मीटर का थ्रो कर एक और इतिहास रच दिया।

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