NEET Success Story: सरकारी नौकरी छोड़ डॉक्टर बनने निकलीं स्मृतिलेखा, गांव में अस्पताल खोलने का है सपना

NEET UG 2026 में 603 अंक लाने वाली स्मृतिलेखा ने सरकारी नौकरी छोड़ डॉक्टर बनने का सपना चुना। अब उनका लक्ष्य गांव में अस्पताल खोलकर बेहतर इलाज देना है।

पश्चिम बंगाल की स्मृतिलेखा ने NEET UG 2026 में 603 अंक हासिल किए। गांव में अस्पताल की कमी से प्रेरित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ मेडिकल की तैयारी की और अब डॉक्टर बनकर ग्रामीणों की सेवा करने का लक्ष्य रखा है।

नई दिल्ली: NEET UG 2026 में 603 अंक हासिल करने वाली पश्चिम बंगाल की स्मृतिलेखा की सफलता केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है। गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को देखते हुए उन्होंने सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़ डॉक्टर बनने का फैसला लिया। परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अपना सपना साकार करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की।

गांव की स्वास्थ्य समस्या बनी डॉक्टर बनने की सबसे बड़ी प्रेरणा

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के पाउशी गांव की रहने वाली स्मृतिलेखा बचपन से ही अपने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी देखती आई हैं। गांव में कोई अस्पताल नहीं होने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए एक से दो घंटे दूर जाना पड़ता है। कई बार समय पर चिकित्सा नहीं मिलने से लोगों की जान भी चली जाती है।

इसी समस्या ने उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना जगाया। उनका उद्देश्य सिर्फ मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाना नहीं, बल्कि भविष्य में अपने गांव में अस्पताल खोलकर लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।

माता-पिता का सपना बना बेटी का लक्ष्य

स्मृतिलेखा एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता दोनों शिक्षक हैं। पिता बिमल कुमार गिरी का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बने और समाज के लिए कुछ बड़ा करे। स्मृतिलेखा ने इस सपने को अपना लक्ष्य बना लिया और पूरी लगन से उसकी तैयारी शुरू की।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें NEET परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। बस इतना तय था कि उन्हें डॉक्टर बनना है। धीरे-धीरे उन्होंने परीक्षा की तैयारी और मेडिकल करियर के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई और उसी दिशा में आगे बढ़ती रहीं।

सरकारी नौकरी छोड़ लिया बड़ा फैसला

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मृतिलेखा को डाक विभाग में केंद्र सरकार की नौकरी मिल गई। अधिकांश लोगों ने इसे सुरक्षित भविष्य मानते हुए नौकरी जारी रखने की सलाह दी। लेकिन नौकरी और NEET की तैयारी को साथ लेकर चलना उनके लिए आसान नहीं था।

करीब दो साल नौकरी करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उनका असली लक्ष्य डॉक्टर बनना है। इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। इस निर्णय का कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के इसी भरोसे ने उन्हें अपने लक्ष्य पर टिके रहने की ताकत दी।

दोबारा तैयारी करना आसान नहीं था

नौकरी छोड़ने के बाद पढ़ाई की लय में वापस लौटना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। दो साल के अंतराल के कारण कई विषय फिर से नए जैसे लगने लगे। इसके अलावा आसपास के लोगों की नकारात्मक बातें भी उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर रही थीं।

बेहतर माहौल और नियमित तैयारी के लिए उन्होंने अपना घर छोड़कर सिलीगुड़ी का रुख किया और एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने शिक्षकों की सलाह को गंभीरता से अपनाया और धीरे-धीरे अपनी तैयारी को मजबूत किया।

470 से 603 अंक तक का शानदार सफर

स्मृतिलेखा ने 2025 में NEET परीक्षा में 470 अंक हासिल किए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कमजोरियों पर लगातार काम किया और अगले प्रयास में 2026 की परीक्षा में 720 में से 603 अंक प्राप्त किए। इसके साथ ही उनकी ऑल इंडिया रैंक 91,941 से सुधरकर 9,065 हो गई और उन्होंने देश के टॉप 10,000 अभ्यर्थियों में जगह बनाई।

यह उपलब्धि उनकी मेहनत, धैर्य और लगातार सीखने की इच्छा का परिणाम है। उन्होंने साबित किया कि सही रणनीति और निरंतर प्रयास से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

NEET अभ्यर्थियों को दी खास सलाह

स्मृतिलेखा का कहना है कि सफलता पाने के लिए सबसे पहले अपने लक्ष्य को स्पष्ट करना जरूरी है। उनका मानना है कि समाज हमेशा अपनी राय देगा, लेकिन निर्णय अपने सपनों और परिवार के विश्वास के आधार पर लेना चाहिए।

उन्होंने NEET की तैयारी कर रहे छात्रों को NCERT पुस्तकों पर विशेष ध्यान देने, शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करने और नियमित अभ्यास करने की सलाह दी। उनके अनुसार, यदि कोई विद्यार्थी पूरे समर्पण के साथ तैयारी करे और खुद पर विश्वास बनाए रखे, तो कठिन से कठिन परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की जा सकती है।

आज स्मृतिलेखा की कहानी केवल एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि उस संकल्प की मिसाल है जिसमें व्यक्तिगत करियर से आगे बढ़कर समाज की सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया गया है।

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