NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद: राहुल गांधी का सरकार पर हमला, CBI जांच तेज

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में राहुल गांधी ने सरकार पर सवाल उठाए। एक आरोपी को 14 दिन की कस्टडी में भेजा गया। देशभर में पेपर लीक को लेकर विवाद बढ़ गया है।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए। CBI ने जांच तेज करते हुए एक आरोपी मंधारे को कस्टडी में भेजा है। देशभर में पेपर लीक को लेकर विवाद बढ़ गया है।

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला अब केवल एक परीक्षा विवाद नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और केंद्रीय जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई का केंद्र बन गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर हमला बोला है। दूसरी ओर, CBI ने जांच तेज करते हुए कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियां की हैं।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा प्रणाली में लगातार विफलता हो रही है, फिर भी जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी शिक्षा मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं, जबकि परीक्षा प्रणाली बार-बार प्रभावित हो रही है।

NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की जांच और गिरफ्तारी

CBI इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और देश के कई हिस्सों में लगातार कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसी ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शिक्षक, बिचौलिए और कोचिंग नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल हैं। मामला तेजी से एक संगठित पेपर लीक नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है, जिसमें कई राज्यों में फैली गतिविधियां सामने आई हैं।

9वीं आरोपी मनीषा मंधारे को 14 दिन की CBI कस्टडी

इस मामले में गिरफ्तार 9वीं आरोपी बॉटनी टीचर मनीषा मंधारे को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की CBI कस्टडी में भेज दिया गया। गिरफ्तारी CBI हेडक्वार्टर में पूछताछ के बाद की गई। एजेंसी का दावा है कि आरोपी परीक्षा से जुड़े पैटर्न और प्रश्नों की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर रही थी।

NTA की पेपर सेटिंग कमेटी से जुड़ाव और गंभीर आरोप

CBI की जांच में यह सामने आया है कि मनीषा मंधारे का संबंध NTA की पेपर सेटिंग कमेटी से रहा है। आरोप है कि उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों की जानकारी थी, जिसका उपयोग उन्होंने अपने कोचिंग नेटवर्क में किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुणे में विशेष कोचिंग क्लास चलाई, जहां छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी के संभावित प्रश्नों का अभ्यास कराया गया।

पेपर लीक नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन के खुलासे

जांच में यह भी सामने आया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। छात्रों और अभिभावकों से परीक्षा के प्रश्न उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाने के आरोप हैं। इस नेटवर्क में बिचौलिए और कोचिंग से जुड़े लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने इस पूरे सिस्टम को फैलाने में भूमिका निभाई।

मास्टरमाइंड और कोचिंग नेटवर्क की भूमिका पर जांच

CBI की जांच में लातूर के केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी का नाम भी सामने आया है, जिन्हें इस नेटवर्क का संभावित मास्टरमाइंड माना जा रहा है। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पहले छात्रों को विशेष क्लास देकर संभावित प्रश्नों की जानकारी दी। जांच एजेंसी इस पूरे कोचिंग नेटवर्क और इसके संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है।

देशभर में CBI की छापेमारी और जांच का दायरा

CBI ने इस मामले को लेकर दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों में छापेमारी की है। पुणे, नासिक, नांदेड़, गुरुग्राम और जयपुर जैसे शहरों में संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

NTA में प्रशासनिक फेरबदल और सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में प्रशासनिक सुधार करते हुए नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। IRS अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार प्राथमिकता में है।

सुप्रीम कोर्ट में NTA को भंग करने की मांग

इस मामले में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA को भंग करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि एक नई राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाई जाए, जो पूरी तरह पारदर्शी और न्यायिक निगरानी में काम करे। साथ ही, परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था की मांग की गई है।

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