Net Neutrality Rules Review: Jio, Airtel और Vi को मिल सकती है अलग-अलग इंटरनेट सर्विस पर चार्ज लेने की अनुमति

सरकार Net Neutrality नियमों की समीक्षा कर रही है। बदलाव लागू होने पर Jio, Airtel और Vi को 5G सेवाओं पर अलग शुल्क लेने की अनुमति मिल सकती है।

भारत सरकार नेट न्यूट्रैलिटी नियमों की समीक्षा पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर Jio, Airtel और Vi जैसी कंपनियां 5G आधारित विशेष सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क ले सकेंगी। इस पर TRAI से भी सुझाव मांगे गए हैं।

Tech: केंद्र सरकार Net Neutrality से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने की तैयारी में है। 5G नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच सरकार यह देख रही है कि क्या टेलीकॉम कंपनियों को अलग-अलग डिजिटल सेवाओं और एंटरप्राइज उपयोग के लिए अलग प्राइसिंग की अनुमति दी जानी चाहिए। इस दिशा में TRAI से भी सुझाव मांगे गए हैं।

नेट न्यूट्रैलिटी नियमों की समीक्षा क्यों हो रही है?

सरकार का मानना है कि 5G तकनीक आने के बाद इंटरनेट सेवाओं का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियम ऐसे समय में बनाए गए थे, जब 5G नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसी वजह से सरकार अब यह समीक्षा कर रही है कि क्या इन नियमों में बदलाव की जरूरत है, ताकि नई तकनीकों के अनुरूप नीतियां तैयार की जा सकें।

5G स्लाइसिंग से क्या बदल सकता है?

यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियां गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस व्हीकल्स, स्मार्ट फैक्ट्री और अन्य हाई-प्रायोरिटी सेवाओं के लिए अलग नेटवर्क क्षमता उपलब्ध करा सकेंगी। इसके बदले कंपनियां या ग्राहक विशेष गुणवत्ता वाली कनेक्टिविटी के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। हालांकि, आम इंटरनेट सेवाओं पर इसका अंतिम प्रभाव सरकार और रेगुलेटर के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

मौजूदा नियम क्या कहते हैं?

नेट न्यूट्रैलिटी का मूल सिद्धांत यह है कि सभी वेबसाइट, ऐप और ऑनलाइन सेवाओं के साथ समान व्यवहार किया जाए। इसके तहत इंटरनेट सेवा प्रदाता किसी खास ऐप या प्लेटफॉर्म को तेज या धीमी स्पीड देने, ब्लॉक करने या भुगतान के आधार पर प्राथमिकता देने की अनुमति नहीं रखते। इसका उद्देश्य सभी यूजर्स और डिजिटल सेवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

TRAI और टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस विषय पर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से सुझाव मांगे हैं। वहीं, एयरटेल पहले से कुछ सेवाओं में 5G नेटवर्क स्लाइसिंग का उपयोग कर रही है, जिसकी समीक्षा दूरसंचार विभाग (DoT) और संबंधित नियामक कर रहे हैं। दूसरी ओर, रिलायंस जियो भी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क क्षमता और प्रदर्शन बेहतर बनाने के लिए 5G स्लाइसिंग तकनीक अपनाने की योजना पर काम कर रही है।

यूजर्स और उद्योग पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर नियमों में संशोधन होता है, तो भविष्य में अलग-अलग डिजिटल सेवाओं के लिए अलग गुणवत्ता वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकती है। इससे उद्योगों को विशेष नेटवर्क सेवाएं मिलने का रास्ता खुल सकता है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए नई प्राइसिंग संरचना कैसी होगी, इसका फैसला सरकार और नियामक संस्थाओं की अंतिम नीति पर निर्भर करेगा।

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