निवेशकों के लिए अलर्ट! गोल्ड और सिल्वर में आ सकती है तेज कमजोरी

निवेशकों के लिए अलर्ट! गोल्ड और सिल्वर में आ सकती है तेज कमजोरी

अगले हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का जोखिम बढ़ गया है। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स की सालाना री-बैलेंसिंग के कारण गोल्ड और सिल्वर में तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है।

Gold-Silver Price Outlook: सोने और चांदी की कीमतों को लेकर अगले हफ्ते निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार में संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह जनवरी महीने में होने वाला ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स (Bloomberg Commodity Index – BCOM) का सालाना री बैलेंसिंग प्रोसेस माना जा रहा है। डॉएचे बैंक (Deutsche Bank) के एनालिस्ट माइकल हसुए ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि इस री बैलेंसिंग के चलते गोल्ड और सिल्वर में तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है।

री बैलेंसिंग कब और कैसे होगी

माइकल हसुए के अनुसार, BCOM का यह सालाना री बैलेंसिंग प्रोसेस 9 जनवरी से 15 जनवरी के बीच पूरा होगा। इस दौरान इंडेक्स से जुड़े फंड्स अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं। इसका सीधा असर उन कमोडिटीज पर पड़ता है, जिनका वेटेज इंडेक्स में घटाया जाता है। इस बार गोल्ड और सिल्वर उन कमोडिटीज में शामिल हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।

कौन सी कमोडिटीज रहेंगी दबाव में

डॉएचे बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड, सिल्वर और एल्युमिनियम ऐसी कमोडिटीज हैं, जिन पर री बैलेंसिंग के दौरान बिकवाली का दबाव बन सकता है। इसके उलट, कोको, कच्चा तेल (Crude Oil), नेचुरल गैस (Natural Gas) और गैस ऑयल जैसी कमोडिटीज को इस प्रक्रिया से फायदा मिल सकता है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों का पैसा एक सेक्टर से निकलकर दूसरे कमोडिटी सेगमेंट की ओर जा सकता है।

ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स का नियम

ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स में एक अहम नियम है, जिसके तहत किसी भी एक कमोडिटी का वेटेज 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। इस नियम का मकसद इंडेक्स में विविधता बनाए रखना है, ताकि किसी एक कमोडिटी का दबदबा ज्यादा न हो। फिलहाल गोल्ड का वेटेज इंडेक्स में करीब 20.4 प्रतिशत के आसपास है। इसी वजह से इस बार सोने का वेटेज घटाकर करीब 14.9 प्रतिशत तक लाया जा रहा है।

सोने की बड़ी बिक्री का अनुमान

वेटेज घटने का सीधा मतलब यह है कि BCOM से जुड़े फंड्स को अपनी गोल्ड होल्डिंग बेचनी पड़ेगी। डॉएचे बैंक के अनुमान के मुताबिक, इस री बैलेंसिंग के दौरान करीब 24 लाख ट्रॉय आउंस सोने की बिक्री हो सकती है। यह बिक्री सिर्फ पांच कारोबारी दिनों में होने की संभावना है। इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई बाजार में आने से सोने की कीमतों पर दबाव बनना तय माना जा रहा है।

गोल्ड की कीमतों पर कितना असर

माइकल हसुए का कहना है कि एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स (ETPs) में देखे गए ऐतिहासिक ट्रेंड्स के आधार पर यह बिक्री सोने की कीमतों पर करीब 2.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक का दबाव बना सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया है कि कीमतों पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार के आंकड़ों का आकलन वीकली आधार पर किया जाता है या मंथली। फिर भी, शॉर्ट टर्म में गोल्ड प्राइस में कमजोरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

चांदी पर भी दिख सकता है असर

चांदी की स्थिति भी सोने से ज्यादा अलग नहीं है। ओपन इंटरेस्ट और एवरेज डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम के आंकड़ों के आधार पर देखा जाए, तो गोल्ड और सिल्वर दोनों ही ऐसी कमोडिटीज में शामिल हैं, जिनमें री बैलेंसिंग के चलते सबसे ज्यादा अतिरिक्त सप्लाई बाजार में आ सकती है। इसका मतलब है कि सिल्वर प्राइस पर भी अगले हफ्ते दबाव बना रह सकता है।

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