Nora Fatehi विवाद: ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने के चलते वर्क परमिट होगा रद्द, 10 वकीलों ने गृह मंत्रालय में दायर की याचिका

Nora Fatehi के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 10 वकीलों ने गृह मंत्रालय में याचिका दायर कर उनके वर्क परमिट रद्द करने की मांग की है।

बॉलीवुड और साउथ फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री Nora Fatehi इन दिनों अपने गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ के चलते विवादों में घिरी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 वकीलों की टीम ने गृह मंत्रालय से संपर्क कर नोरा के वर्क परमिट को रद्द करने और उन्हें भारत से डिपोर्ट करने की मांग की है। 

एंटरटेनमेंट न्यूज़: नोरा फतेही की मुश्किलें कन्नड़ फिल्म KD Devil के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर बढ़ती जा रही हैं। गाने के हिंदी वर्जन में अश्लील बोलों को लेकर नोरा फतेही और संजय दत्त दोनों ही लोगों के निशाने पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 10 वकीलों के एक ग्रुप ने गृह मंत्रालय से संपर्क कर नोरा फतेही का वर्क परमिट रद्द करने और उन्हें भारत से डिपोर्ट करने की मांग की है। यह विवाद उस समय सामने आया है जब भारत सरकार ने इस गाने को बैन कर दिया है।

साथ ही, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। गाने के शब्दों को लेकर विवाद में गीतकार रकीब आलम ने डायरेक्टर प्रेम पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कन्नड़ गीत का जबर्दस्ती वर्ड-टू-वर्ड ट्रांसलेशन करवाया, जिससे विवाद बढ़ा।

गाने में अश्लीलता के आरोप

वकीलों ने याचिका में दावा किया है कि गाने के बोल 'बेहद अश्लील' और यौन रूप से उत्तेजक हैं। उनका तर्क है कि यह सार्वजनिक नैतिकता और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है। वकीलों ने कहा कि नोरा फतेही ने भारत में काम करने के अपने विशेषाधिकार का दुरुपयोग किया है, और इसके लिए भारतीय कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

याचिका में विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता, महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का उल्लंघन भी आरोपित किया गया है।

मंत्रालयों और आयोग को शिकायत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोरा के खिलाफ केवल गृह मंत्रालय ही नहीं, बल्कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग को भी शिकायत भेजी गई है। विशेष बात यह है कि गाने में शामिल अभिनेता संजय दत्त पर उतना विवाद नहीं है, जितना नोरा फतेही के खिलाफ मचा है।

इस विवाद के बीच नोरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह गाना तीन साल पहले कन्नड़ भाषा में शूट किया था और उसके हिंदी ट्रांसलेटेड वर्जन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। नोरा ने वीडियो में बताया, "मुझे कन्नड़ भाषा नहीं आती, इसलिए मैं डायरेक्टर की कही बात पर भरोसा करती हूं। हिंदी वर्जन के लिए मेरी कोई मंजूरी नहीं ली गई। 

जब मैंने हिंदी वर्जन देखा, तो मुझे पता चला कि यह विवादित हो सकता है। मैंने तुरंत खुद को प्रोजेक्ट से अलग कर लिया और इसका प्रमोशन नहीं किया।अभिनेत्री ने यह भी कहा कि गाने के लॉन्च इवेंट में AI से बनाई गई उनकी और संजय दत्त की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे उन्हें असहजता हुई।

वकीलों ने सफाई को खारिज किया

वकीलों ने नोरा की सफाई को खारिज कर दिया और कहा कि यह ‘बाद में सोच-समझकर की गई बात’ है। उनका तर्क है कि कलाकार किसी प्रोजेक्ट के लिए क्रेडिट और पैसे तो ले सकते हैं, लेकिन उसके कंटेंट से खुद को अलग नहीं कर सकते। वकीलों ने यह भी कहा कि AI टूल्स के इस्तेमाल से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, और समाज में अश्लीलता और महिलाओं के अपमान को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर कार्रवाई होनी चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद अलीगढ़ के मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने भी नोरा फतेही के खिलाफ फतवा जारी किया। उन्होंने गाने के कंटेंट को आपत्तिजनक और इस्लामी उसूलों के खिलाफ बताया।

संसद में मुद्दा, केंद्र सरकार ने बैन की पुष्टि की

गाने की अश्लीलता और आपत्तिजनक कंटेंट के चलते केंद्रीय सरकार ने इसे बैन कर दिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में इसकी पुष्टि की। सांसद आनंद भदौरिया के सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि गाने को यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कलाकारों, मेकर्स और सेंसर बोर्ड के बीच जिम्मेदारी और नियंत्रण को लेकर एक उदाहरण बन सकता है।

यह विवाद यह भी दर्शाता है कि विदेशी कलाकारों की भारत में काम करने की प्रक्रियाओं और उनके कंटेंट की निगरानी पर सख्त कानूनी नजर रखी जा रही है। नोरा फतेही की प्रतिक्रिया और वकीलों की याचिका के बाद इस मामले की कानूनी और सामाजिक गंभीरता बढ़ गई है।

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