Government of India ने देश से Left Wing Extremism को समाप्त करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद की समस्या को भी पूरी तरह खत्म करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक नई व्यापक सुरक्षा रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत वर्ष 2029 तक क्षेत्र में मौजूद सभी सशस्त्र उग्रवादी समूहों को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम वामपंथी उग्रवाद (LWE) और माओवादी नेटवर्क पर सफल कार्रवाई के बाद अगली बड़ी सुरक्षा पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह अभियान विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में शांति और स्थिरता बहाल करने पर केंद्रित होगा, जिसकी शुरुआत सबसे संवेदनशील क्षेत्र Manipur से की जाएगी।
पूर्वोत्तर में 16 सक्रिय उग्रवादी संगठन
सरकारी आकलन के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत में वर्तमान में लगभग 16 सक्रिय उग्रवादी संगठन मौजूद हैं। इनमें से सबसे अधिक 8 संगठन Manipur में सक्रिय हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से जातीय हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। अन्य राज्यों में स्थिति इस प्रकार है:
- असम में 3 उग्रवादी संगठन
- मेघालय में 2 संगठन
- त्रिपुरा में 2 संगठन
- नागालैंड में 1 संगठन
इन समूहों पर क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने और सीमा पार नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप भी लगते रहे हैं।
सुरक्षा रणनीति का नया चरण
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केंद्र सरकार का मानना है कि देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सफल अभियानों के बाद अब फोकस पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने पर होना चाहिए। योजना के तहत, विभिन्न सुरक्षा बलों को चरणबद्ध तरीके से पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात किया जाएगा। इन बलों को पहले से नक्सल और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया था।
मणिपुर से होगी शुरुआत
अभियान की शुरुआत Manipur से होगी, जहां पिछले तीन वर्षों से जातीय तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह राज्य सुरक्षा दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां तैनाती के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो इकाइयों को शामिल किया जाएगा, ताकि जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और गुरिल्ला शैली की गतिविधियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
इस अभियान में CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) की अहम भूमिका होगी। यह यूनिट विशेष रूप से माओवादी और नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित है और इसे गुरिल्ला युद्ध में विशेषज्ञता प्राप्त है। शुरुआत में इसी फोर्स को पूर्वोत्तर क्षेत्रों में तैनात किए जाने की संभावना है, ताकि उग्रवादी नेटवर्क को तेजी से कमजोर किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे की जाएगी। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से बलों को हटाकर उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानांतरित किया जाएगा। यह प्रक्रिया वर्ष 2026 के मध्य से शुरू होने की संभावना है, हालांकि इसका अंतिम समय राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।










