OBC Creamy Layer: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा 2 साल का समय, जानें क्या है पूरा मामला

OBC Creamy Layer मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले को लागू करने के लिए 2 साल का समय मांगा है। जानें सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सरकार की दलील

OBC आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ के नियम को 2012 से लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन को लेकर केंद्र सरकार ने अदालत से राहत की मांग की है। केंद्र ने अनुरोध किया है कि फैसले को भविष्य में लागू किया जाए और इसके क्रियान्वयन के लिए दो साल का समय दिया जाए।

OBC Reservation Creamy Layer: OBC आरक्षण में Creamy Layer तय करने के नियमों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग की है। केंद्र ने अदालत से कहा है कि मार्च 2026 के फैसले को prospective effect यानी भविष्य में लागू किया जाए और नई व्यवस्था तैयार करने के लिए उसे करीब दो साल का समय दिया जाए। 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को इस मांग पर अपना order reserved रख लिया है। यानी अभी केंद्र को दो साल की मोहलत मिलने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

क्या है Supreme Court का OBC Creamy Layer फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC Creamy Layer से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा था कि किसी उम्मीदवार को OBC reservation से बाहर करने के लिए उसके माता-पिता की salary या income को अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि Income/Wealth Test के साथ माता-पिता की नौकरी का status और category भी देखी जानी चाहिए।

यह मामला खास तौर पर Public Sector Undertakings (PSUs) और अन्य संस्थानों में काम करने वाले अभिभावकों के बच्चों के OBC-NCL status से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में 1993 के Office Memorandum के तहत Creamy Layer तय करने के लिए निर्धारित विभिन्न tests और post equivalence पर भी विचार किया गया।

केंद्र सरकार ने क्यों मांगा दो साल का समय?

केंद्र की ओर से Additional Solicitor General Aishwarya Bhati ने अदालत में लिखित note दाखिल किया। सरकार का कहना है कि अगर नए eligibility criteria को पिछली तारीख से लागू किया गया तो पहले से हो चुकी appointments और admissions पर असर पड़ सकता है। सरकार के मुताबिक इससे OBC-NCL status, seniority, service conditions, cadre allocation और career progression जैसे मामलों में बड़े बदलाव की स्थिति पैदा हो सकती है। केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि इसका प्रभाव केवल OBC candidates तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि civil services की दूसरी categories पर भी पड़ सकता है।

CSE-2012 से जुड़े मामलों पर क्यों पड़ सकता है असर?

केंद्र के अनुसार, अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को retrospective तरीके से लागू किया जाता है तो Civil Services Examination (CSE)-2012 और उसके बाद नियुक्त हुए कुछ अधिकारियों की service और cadre allocation की समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस तरह के बदलाव से एक appointment या status में बदलाव का असर आगे की appointments और service structure पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्र ने इसे एक संभावित cascading effect बताया है।

नई OBC Creamy Layer Policy के लिए क्या करना चाहती है सरकार?

केंद्र का कहना है कि उसे सभी stakeholders से consultation करने के बाद OBC Creamy Layer status तय करने के लिए एक uniform policy और mechanism तैयार करना होगा। इसके अलावा PSU और private-sector employees के posts की सरकारी पदों के साथ equivalence तय करने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस administrative exercise के लिए दो साल का reasonable time आवश्यक है।

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को review या पूरी तरह बदलने की मांग नहीं कर रहा है। उसकी मांग मुख्य रूप से फैसले के operationalisation को सीमित अवधि के लिए defer करने की है, ताकि नई व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक administrative framework तैयार किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?

24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस application पर अपना order reserve कर लिया, जिसमें मार्च के फैसले को prospective बनाने और implementation के लिए दो साल का समय देने की मांग की गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाया कि फैसले को लागू करने के लिए पहले दिए गए समय के बावजूद केंद्र ने अगस्त के अंत में modification की मांग क्यों की।

इसलिए फिलहाल स्थिति यह है कि OBC Creamy Layer के नए नियमों को लेकर केंद्र की दो साल की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आना बाकी है।

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