ओडिशा राजनीति में एक मजबूत आवाज खामोश, सुशीला तिरिया नहीं रहीं

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुशीला तिरिया का 70 वर्ष की उम्र में एम्स भुवनेश्वर में निधन हो गया। ओडिशा में उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुशीला तिरिया का रविवार को एम्स भुवनेश्वर में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थीं। ओडिशा की राजनीति में उनके निधन से गहरा शोक व्याप्त है।

Sushila Tiriya Passes Away: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुशीला तिरिया का रविवार शाम एम्स भुवनेश्वर (AIIMS Bhubaneswar) में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। परिजनों के अनुसार, वह फेफड़ों के संक्रमण (lung infection) से पीड़ित थीं और पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। उनके निधन की खबर सामने आते ही ओडिशा की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। मयूरभंज सहित पूरे राज्य में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में गहरा दुख देखा गया।

एम्स भुवनेश्वर में चल रहा था इलाज

सुशीला तिरिया को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद भुवनेश्वर स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए थी, लेकिन रविवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि होते ही कांग्रेस पार्टी की ओडिशा इकाई और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया। परिजनों ने बताया कि उनकी हालत कुछ दिनों से गंभीर बनी हुई थी।

ओडिशा कांग्रेस ने जताया गहरा शोक

कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने बयान जारी कर कहा कि मयूरभंज की वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व लोकसभा व राज्यसभा सदस्य के निधन से पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि सुशीला तिरिया ने हमेशा पार्टी और समाज के लिए समर्पित भाव से काम किया। उनके जाने से ओडिशा की राजनीति में एक मजबूत और अनुभवी आवाज खामोश हो गई है।

सुशीला तिरिया का राजनीतिक सफर

सुशीला तिरिया ओडिशा की उन गिनी-चुनी नेताओं में शामिल थीं, जिन्होंने राज्य की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा और इसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे न केवल एक सांसद थीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की मजबूती में भी उनकी अहम भूमिका रही।

लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व

सुशीला तिरिया दो बार मयूरभंज लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। इसके अलावा वह दो बार राज्यसभा की सदस्य भी रहीं। संसद में रहते हुए उन्होंने आदिवासी अधिकार, महिलाओं के मुद्दे और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों को मजबूती से उठाया। उनकी पहचान एक मुखर सांसद के रूप में रही, जो बिना झिझक अपनी बात रखती थीं।

आदिवासी समाज की मजबूत आवाज

सुशीला तिरिया को ओडिशा में आदिवासी नेतृत्व (tribal leadership) के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। वह खुद आदिवासी समुदाय से आती थीं और उन्होंने हमेशा इस समाज की समस्याओं को प्राथमिकता दी। शिक्षा, स्वास्थ्य, जमीन के अधिकार और रोजगार जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार आवाज उठाई। आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी उनके प्रयासों को याद किया जाता है।

महिलाओं के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका

राजनीति में रहते हुए सुशीला तिरिया ने महिलाओं से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता से उठाया। संसद के भीतर और बाहर उन्होंने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके अधिकारों की रक्षा की बात कही। यही वजह है कि उन्हें एक संवेदनशील और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में सम्मान मिला।

कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा

सुशीला तिरिया का राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी के साथ गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने दशकों तक पार्टी के भीतर अलग-अलग पदों पर रहकर संगठन को मजबूत किया। कठिन राजनीतिक हालात में भी उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। कांग्रेस के भीतर उन्हें एक अनुशासित और समर्पित नेता के रूप में जाना जाता था।

Leave a comment