ओडिशा सरकार ने विवादित कोटिया क्षेत्र में डिग्री कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार योजनाओं के जरिए इलाके के विकास पर जोर दे रही है, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकें।
भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने आंध्र प्रदेश के साथ लंबे समय से विवादित कोटिया क्षेत्र में विकास कार्यों को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री Suresh Pujari ने घोषणा की है कि सरकार कोटिया इलाके में एक डिग्री कॉलेज स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
कोटिया क्षेत्र ओडिशा के कोरापुट जिले में स्थित है और इस पर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश भी दावा करता है। इस सीमा विवाद को लेकर मामला वर्ष 1968 से भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद के बीच ओडिशा सरकार अब क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है।
मंत्रियों का दौरा और स्थानीय कार्यक्रमों में भागीदारी
राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी और कानून मंत्री Prithiviraj Harichandan ने हाल ही में कोटिया क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत की।
उन्होंने पुरी के Shree Jagannath Temple से लाई गई देवी सुभद्रा के रथ चक्र स्थापना से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लिया। सरकार इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए स्थानीय समुदाय से जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
70 वर्षों से विकास से वंचित रहा क्षेत्र
सुरेश पुजारी ने कहा कि कोटिया क्षेत्र लंबे समय तक विकास से वंचित रहा, जिसका फायदा आंध्र प्रदेश ने उठाया। उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश सरकार ने विकास योजनाओं और कल्याणकारी परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि अब ओडिशा सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है और क्षेत्र के लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद कई वरिष्ठ मंत्री और उपमुख्यमंत्री Pravati Parida भी कोटिया क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं और वहां जनकल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की गई है।
डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी शुरू
ओडिशा सरकार ने कोटिया क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिग्री कॉलेज स्थापित करने की योजना बनाई है। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
सरकार का मानना है कि शिक्षा सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र के छात्रों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। नया कॉलेज बनने से स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा, सरकार गरीब और मेधावी छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर भेजने की भी योजना बना रही है, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकें।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने कोटिया क्षेत्र में पर्यटन विकास और रोजगार सृजन के लिए भी धनराशि स्वीकृत की है। अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
पर्यटन परियोजनाओं के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की योजना बनाई जा रही है। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना
सरकार ने कोटिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार पर भी जोर दिया है। मंत्री ने कहा कि दूरदराज़ होने के कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन अब अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
सड़क परियोजनाओं और कल्याण योजनाओं का उद्घाटन
कोरापुट जिले के दौरे के दौरान मंत्रियों ने कई सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। बेहतर सड़क संपर्क को क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों तक पहुंच आसान होगी।
इसके साथ ही स्थानीय लोगों को वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत भूमि पट्टे वितरित किए गए। राशन कार्ड, पेंशन स्वीकृति और सुभद्रा योजना के तहत लाभ भी पात्र लोगों को प्रदान किए गए।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य कोटिया क्षेत्र के लोगों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है।
कोटिया विवाद: दशकों पुराना सीमा मामला
कोटिया क्षेत्र लंबे समय से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा विवाद का केंद्र रहा है। दोनों राज्य इस क्षेत्र के कई गांवों पर दावा करते हैं। मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित होने के बावजूद दोनों राज्यों की सरकारें स्थानीय स्तर पर विकास और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं के जरिए ओडिशा सरकार क्षेत्र में अपनी प्रशासनिक मौजूदगी को मजबूत करना चाहती है।










