पटना सिटी स्थित शक्तिपीठ बड़ी पटनदेवी मंदिर परिसर में इन दिनों मां के दर्शन के साथ तीन नन्हीं गायों को देखने के लिए भी श्रद्धालु रुक रहे हैं। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से पुंगनूर नस्ल की तीन गायें मंदिर परिसर में लाई गई हैं। अपने बेहद छोटे कद और अलग बनावट के कारण ये गायें श्रद्धालुओं, खासकर बच्चों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मंदिर आने वाले लोग कुछ देर रुककर इन्हें निहार रहे हैं और इनके बारे में जानकारी ले रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार इन तीनों के नाम राधा, सती और नंदी रखे गए हैं। करीब एक वर्ष की बाछी का नाम राधा, सात महीने की बाछी का नाम सती और आठ महीने के बछड़े का नाम नंदी है। मंदिर परिसर में इनके रहने, खाने और देखभाल के लिए अलग व्यवस्था की गई है। दिनभर परिसर में रहने के बाद शाम करीब चार बजे तीनों को मंदिर की गोशाला में ले जाया जाता है। इनके ठहरने के लिए शीशे की घेराबंदी वाला अलग स्थान भी बनाया गया है, ताकि श्रद्धालु इन्हें देख सकें और इनके पास अनावश्यक भीड़ न हो।
पुंगनूर नस्ल अपनी छोटी कद-काठी के लिए जानी जाती है। बड़ी पटनदेवी मंदिर में लाई गई इन गायों की ऊंचाई करीब दो फीट बताई गई है। पुंगनूर नस्ल आंध्र प्रदेश के पुंगनूर क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है और उपलब्ध नस्ल संबंधी जानकारी में इसकी ऊंचाई आमतौर पर करीब 70 से 90 सेंटीमीटर के आसपास बताई जाती है। यही छोटा आकार इन गायों को दूसरी सामान्य कद-काठी वाली गायों से अलग बनाता है और मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ा रहा है।
मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, तीनों गायों की नियमित देखभाल की जा रही है। इनके खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच इन नन्हीं गायों को घूमते हुए देखा जा सकता है। कई लोग इन्हें देखकर रुक जाते हैं, जबकि बच्चे इनके छोटे आकार को देखकर खास तौर पर उत्साहित नजर आते हैं। श्रद्धालु इनके साथ तस्वीरें भी लेते हैं और पुंगनूर नस्ल के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इन गायों को यहां रखने का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं का आकर्षण बढ़ाना नहीं है, बल्कि लोगों को गोपालन और पशुओं के प्रति स्नेह के लिए प्रेरित करना भी है। महंत विजय शंकर गिरी ने लोगों से अपनी क्षमता और उपलब्ध स्थान के अनुसार छोटी नस्ल की गायों के पालन पर विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि पशुओं के प्रति प्रेम और उनकी उचित देखभाल की भावना को बढ़ावा मिलना चाहिए।
पुंगनूर गायों की खासियत को लेकर देश के दूसरे हिस्सों में भी लोगों की रुचि रही है। इनकी छोटी कद-काठी के कारण तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचते रहे हैं। पटना की बड़ी पटनदेवी में इन गायों के पहुंचने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अब धार्मिक दर्शन के साथ इस विशेष नस्ल को करीब से देखने का अवसर भी मिल रहा है।
बड़ी पटनदेवी पटना के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और बिहार पर्यटन विभाग भी इसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में सूचीबद्ध करता है। मंदिर को शक्तिपीठ की परंपरा से जोड़ा जाता है और नवरात्र समेत प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में पुंगनूर नस्ल की इन तीन गायों की मौजूदगी लोगों के लिए एक अलग तरह का आकर्षण बन गई है।
मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन गायों को देखने की व्यवस्था इस तरह की गई है कि उन्हें अलग घेराबंदी में रखा जा सके। इससे एक ओर लोग आसानी से इन्हें देख सकते हैं, वहीं दूसरी ओर गायों को लगातार भीड़ के बीच रहने से बचाया जा सकता है। खासकर बच्चों के लिए यह अनुभव नया है, क्योंकि सामान्य कद वाली गायों की तुलना में इनका आकार काफी छोटा दिखाई देता है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार दोनों बाछियों के बड़े होने के बाद अगले वर्ष बछड़ा देने और दूध देने की उम्मीद है। फिलहाल तीनों अभी छोटी उम्र की हैं और उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर में इन्हें नियमित भोजन और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है।
पुंगनूर नस्ल के छोटे आकार को देखते हुए मंदिर प्रबंधन इसे सीमित जगह में पालन के लिए भी उपयोगी मानता है। हालांकि किसी भी पशु के पालन के लिए पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, उपयुक्त आवास और नियमित स्वास्थ्य देखभाल जरूरी होती है। इस वजह से इन गायों को केवल उनके छोटे आकार के कारण पालने के बजाय उनकी जरूरतों के अनुरूप देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है।
बड़ी पटनदेवी मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच राधा, सती और नंदी की चर्चा भी हो रही है। मां के दर्शन के लिए आने वाले लोग जब मंदिर परिसर में इन नन्हीं गायों को देखते हैं तो कुछ देर उनके पास रुक जाते हैं। बच्चों में इनके प्रति विशेष उत्सुकता दिखाई दे रही है। मंदिर प्रबंधन को उम्मीद है कि इन गायों की मौजूदगी लोगों में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और गोपालन के प्रति रुचि बढ़ाने का माध्यम बनेगी।
इस तरह पटना की बड़ी पटनदेवी में इन दिनों धार्मिक आस्था के साथ पुंगनूर नस्ल की नन्हीं गायें भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनी हुई हैं। राधा, सती और नंदी अपने छोटे कद के कारण मंदिर पहुंचने वाले लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से इनके लिए अलग सुरक्षित स्थान और गोशाला की व्यवस्था की गई है, जबकि श्रद्धालु इन्हें देखकर इनके बारे में जानकारी लेने और तस्वीरें लेने के लिए रुक रहे हैं।











