पटना पुलिस में जमीन विवाद से जुड़े मामले को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। नौबतपुर थानाध्यक्ष मंजीत ठाकुर को 25 बीघा जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज के मामले में निलंबित कर दिया गया है। उन पर जमीन विवाद में एक पक्ष का कथित तौर पर समर्थन करने और फर्जी दस्तावेज से जुड़े मामले में भूमिका निभाने के आरोप सामने आए थे। मामले की शिकायत पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने के बाद जांच के निर्देश दिए गए और इसके बाद पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेज दिया।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, नौबतपुर थाना क्षेत्र के पैनापुर में करोड़ों रुपये की कीमत वाली करीब 25 बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि इस विवाद में थानाध्यक्ष मंजीत ठाकुर एक पक्ष का समर्थन कर रहे थे। जिस पक्ष के समर्थन की बात सामने आई, उसके कुछ लोगों द्वारा उक्त जमीन खरीदने और जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर किए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि इन आरोपों की पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले की जानकारी दूसरे पक्ष को मिलने के बाद इसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय में की गई। शिकायत में जमीन विवाद के साथ पुलिस अधिकारी की कथित भूमिका और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की गई। पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया। जांच के आधार पर थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके बाद पटना एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा के मुताबिक, फर्जी दस्तावेज से जुड़े मामले में नौबतपुर थानाध्यक्ष को निलंबित कर पुलिस लाइन भेजा गया है। फिलहाल नौबतपुर थाने में तैनात एक अन्य पुलिस अधिकारी को थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका मतलब है कि जांच की अवधि में थाने का नियमित कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जमीन से जुड़े विवादों में पुलिस की भूमिका को लेकर बिहार में हाल के महीनों में प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी व्यवस्था के मुताबिक जमीन विवाद मूल रूप से राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विषय हैं, जबकि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। बिना सक्षम प्राधिकारी के आदेश के जमीन पर कब्जा दिलाने, चहारदीवारी कराने या निर्माण कराने जैसी कार्रवाई की शिकायत मिलने पर संबंधित पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
नौबतपुर के पैनापुर की 25 बीघा जमीन के मामले में भी अब जांच का दायरा सिर्फ जमीन के दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने वाला है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जांच के निर्देश दिए जाने और थानाध्यक्ष को निलंबित किए जाने के बाद यह देखा जाएगा कि जमीन के दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए, उनमें कथित बदलाव कैसे हुआ और विवाद के दौरान पुलिस की ओर से किस तरह की कार्रवाई की गई थी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में दस्तावेजों की कथित हेराफेरी से जुड़े पूरे विवरण और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
पटना में जमीन से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामलों में प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। फरवरी 2026 में फुलवारीशरीफ अंचल में एक मामले की जांच में फर्जी सेल डीड के आधार पर जमाबंदी कराए जाने की पुष्टि के बाद डीएम के आदेश पर जमाबंदी रद्द की गई थी और प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उस मामले में राजस्वकर्मी को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।
जमीन के कागजात से जुड़े विवादों में दस्तावेजों की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक ही जमीन को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से बिक्री, जमाबंदी, कब्जे और स्वामित्व के दावे सामने आ सकते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, निबंधन कार्यालय के दस्तावेज, दाखिल-खारिज रिकॉर्ड और न्यायालय में लंबित मुकदमों की स्थिति की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है। पटना में भूमि अभिलेखों से जुड़े मामलों में प्रशासन पहले भी अधिकारियों को रिकॉर्ड की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दे चुका है।
नौबतपुर थानाध्यक्ष के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब पुलिस विभाग के स्तर पर भी यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि विवादित जमीन से जुड़े मामले में थाना स्तर पर क्या-क्या कदम उठाए गए थे। पुलिस मुख्यालय की शिकायत के बाद जांच और निलंबन की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि विभाग ने आरोपों को गंभीरता से लिया है। हालांकि निलंबन अपने आप में किसी आरोप का अंतिम रूप से प्रमाणित होना नहीं है; आगे की विभागीय या अन्य जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति तय होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंजीत ठाकुर पर इससे पहले भी अलग-अलग जगहों पर तैनाती के दौरान आरोप लग चुके हैं। नौबतपुर से पहले जिस अन्य थाने में वह तैनात थे, वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें वहां से हटाकर चौक थाने की जिम्मेदारी दी गई थी। चौक थाना क्षेत्र में एक विदेशी महिला को लूट के दौरान चाकू मारे जाने की घटना में ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में भी उन्हें निलंबित किया गया था। बाद में उन्हें फिर नौबतपुर थाने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये सभी पुराने आरोप और विभागीय कार्रवाइयां संबंधित रिपोर्टों पर आधारित हैं।
वर्तमान मामले में सबसे अहम बिंदु पैनापुर की करीब 25 बीघा जमीन और उससे जुड़े दस्तावेज हैं। जमीन की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है, जिसके कारण विवाद की गंभीरता भी बढ़ जाती है। पुलिस मुख्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद हुई कार्रवाई से यह मामला अब विभागीय जांच के दायरे में है। आने वाले समय में जांच के दौरान जमीन के मूल दस्तावेज, कथित फर्जी दस्तावेज, जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड और थाना स्तर पर की गई कार्रवाई की पड़ताल की जा सकती है।
इस कार्रवाई का असर नौबतपुर थाना क्षेत्र में चल रहे अन्य भूमि विवादों पर भी पड़ सकता है। जमीन विवादों में पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका अलग-अलग होने के कारण अधिकारियों के लिए यह जरूरी है कि कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जाए। बिहार में भूमि विवादों को लेकर लागू नई व्यवस्था में भी पुलिस और राजस्व अधिकारियों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है।
फिलहाल नौबतपुर थानाध्यक्ष मंजीत ठाकुर को निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है और थाने की जिम्मेदारी दूसरे पुलिस अधिकारी को दी गई है। पैनापुर की 25 बीघा जमीन के कथित फर्जी दस्तावेज मामले में आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई, जमीन विवाद में किन लोगों की भूमिका थी और थानाध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों के संबंध में जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।










