दो बार की ओलंपिक पदक विजेता और भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में युवा खिलाड़ियों को खेल और पढ़ाई के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
स्पोर्ट्स न्यूज़: दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार P.V. Sindhu ने युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि खेल के साथ-साथ शिक्षा पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है। गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पीवी सिंधू ने स्पष्ट किया कि केवल खेल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। उनका यह संदेश खासकर युवा खिलाड़ियों और छात्रों के लिए प्रेरक है, ताकि वे अपने करियर और भविष्य को संतुलित और मजबूत तरीके से तैयार कर सकें।
“पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते”
सिंधू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “आप पूरी जिंदगी खेल नहीं सकते। एक समय आता है जब आपको रिटायर होना पड़ता है। लेकिन शिक्षा हमेशा आपके साथ रहती है। खेल करियर सीमित होता है, जबकि पढ़ाई जीवनभर काम आती है। उन्होंने जोर दिया कि खेल में चोट या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियां कभी भी करियर खतरे में डाल सकती हैं। इसके लिए हमेशा जीवन में बैकअप और मजबूत शिक्षा का होना बेहद जरूरी है।
पीवी सिंधू ने स्पष्ट कहा कि खेल और पढ़ाई दोनों को बराबरी से महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई भी सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं होता। मेहनत पढ़ाई में भी जरूरी है और खेल में भी। दोनों बराबर महत्वपूर्ण हैं। सिंधू ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद एमबीए की पढ़ाई की है और साथ में खेल प्रशिक्षण करना आसान नहीं था। उनका अनुभव यह दिखाता है कि उचित समय प्रबंधन और अनुशासन के साथ खेल और शिक्षा दोनों पर ध्यान दिया जा सकता है

चोट और करियर का जोखिम
सिंधू ने अपने करियर के दौरान आई चोटों का उदाहरण दिया। उन्होंने 2015 में अपने पैर में स्ट्रेस फ्रैक्चर का जिक्र किया, जिसने उन्हें छह महीने तक खेल से दूर रखा। उस समय 2016 रियो ओलंपिक से पहले उनके मन में सवाल था कि क्या वे दोबारा खेल सकती हैं या नहीं। सिंधू ने कहा, “स्पोर्ट्स बहुत रिस्की है। चोट कब लग जाए, पता नहीं चलता। उस समय आपको जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए।” उन्होंने अपनी कठिनाइयों का उदाहरण देकर युवा खिलाड़ियों को यह संदेश दिया कि शिक्षा और तैयारियां उन्हें किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में सहारा देती हैं।
पीवी सिंधू ने अपने कोच पुलेला गोपीचंद की सोच से सहमति जताई। गोपीचंद हमेशा खिलाड़ियों को पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते रहे हैं। सिंधू का मानना है कि शिक्षा ही खेल करियर के बाद सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, “मेरे कोच ने हमेशा कहा कि पढ़ाई को नजरअंदाज न करें। यही सफलता की कुंजी है।










