फालता सीट पर काउंटिंग शुरू, रीपोलिंग में बढ़ी वोटिंग; TMC उम्मीदवार के पीछे हटने से बढ़ा सस्पेंस

पश्चिम बंगाल चुनाव: फालता सीट पर काउंटिंग जारी है। रीपोलिंग में 88.13% मतदान हुआ। TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के पीछे हटने से मुकाबला दिलचस्प बन गया है।

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर रीपोलिंग के बाद मतगणना शुरू हो गई है। यहां 88.13% मतदान दर्ज किया गया। TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव से पीछे हटने के ऐलान के बावजूद EVM पर उनका नाम और सिंबल बना रहा।

फालता: पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान के बाद अब मतगणना शुरू हो चुकी है। यह सीट इस बार केवल राजनीतिक मुकाबले की वजह से ही नहीं, बल्कि EVM विवाद, कथित छेड़छाड़ और तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार के अचानक पीछे हटने के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

चुनाव आयोग के अनुसार, 21 मई को हुए रीपोलिंग में 88.13% मतदान दर्ज किया गया, जो पहले चरण के मतदान से लगभग 2% अधिक है। इससे पहले 29 अप्रैल को यहां 86.71% वोटिंग हुई थी। फालता के सभी 285 बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया था।

विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर और राज्य में भाजपा के उभार का बड़ा संकेतक माना जा रहा है।

TMC उम्मीदवार के पीछे हटने से बढ़ा राजनीतिक ड्रामा

फालता सीट पर सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने दोबारा मतदान से ठीक पहले घोषणा कर दी कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।

हालांकि उन्होंने आधिकारिक रूप से नामांकन वापस नहीं लिया था। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नाम वापस लेने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। यही वजह रही कि EVM में TMC के चुनाव चिन्ह के साथ जहांगीर खान का नाम और फोटो बरकरार रहा।

इस स्थिति ने कई संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए। चुनावी प्रक्रिया के दौरान TMC के कई स्थानीय कार्यकर्ता मतदान अभियान से दूर रहे, जबकि खुद जहांगीर खान मतदान वाले दिन सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।

TMC नेतृत्व ने बाद में स्पष्ट किया कि जहांगीर का फैसला उनका “निजी निर्णय” था और पार्टी आधिकारिक रूप से चुनाव मैदान में बनी हुई है।

EVM विवाद ने बढ़ाई चुनाव की संवेदनशीलता

फालता सीट पर चुनावी विवाद की शुरुआत 29 अप्रैल के मतदान के बाद हुई। कई बूथों से शिकायतें आईं कि EVM मशीनों पर भाजपा के चुनाव चिन्ह पर कथित तौर पर टेप चिपकाया गया था।

स्थिति गंभीर होने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा किया। जांच में कम से कम 60 बूथों में कथित अनियमितताओं और छेड़छाड़ के संकेत मिले।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल EVM ही नहीं बल्कि कई मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों की फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी। इस घटनाक्रम ने चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए।

चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया।

भाजपा और TMC के बीच सीधा मुकाबला

फालता विधानसभा सीट पर कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस सीट का परिणाम केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।

इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 293 सीटों में से 207 सीटें जीतीं, जबकि TMC केवल 80 सीटों तक सिमट गई। यह पिछले 15 वर्षों में पहली बार है जब ममता बनर्जी की पार्टी सत्ता से बाहर हुई है।

अगर भाजपा फालता सीट जीतने में सफल रहती है, तो उसकी कुल सीट संख्या 208 तक पहुंच जाएगी।

फालता का राजनीतिक इतिहास

फालता विधानसभा सीट कभी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। हालांकि पिछले दो दशकों में यहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यह सीट 2001 में जीती थी। 2006 में CPI(M) ने वापसी की, लेकिन 2011 के बाद से लगातार TMC का कब्जा बना रहा।

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा अब तक इस सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी। हालांकि हाल के वर्षों में दक्षिण 24 परगना जिले में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है।

दक्षिण 24 परगना में भाजपा का बढ़ता प्रभाव

फालता दक्षिण 24 परगना जिले का हिस्सा है, जहां कुल 31 विधानसभा सीटें हैं। हालिया चुनावों में भाजपा ने जिले की 10 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की।

सागर, काकद्वीप, गोसाबा और सोनारपुर जैसे क्षेत्रों के अलावा जादवपुर, टॉलीगंज और बेहला पूर्व-पश्चिम जैसे शहरी इलाकों में भी भाजपा ने पहली बार जीत हासिल की।

हालांकि बासंती, कुलतली, रायदीघी और बजबज जैसी सीटों पर TMC अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण बंगाल में भाजपा का विस्तार राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

कानूनी सवाल: क्या जहांगीर खान जीत का दावा कर सकते हैं?

जहांगीर खान के चुनाव से हटने की मौखिक घोषणा ने संवैधानिक बहस को भी जन्म दिया है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उम्मीदवार ने केवल सार्वजनिक बयान दिया हो लेकिन चुनाव आयोग के समक्ष आधिकारिक रूप से नाम वापस न लिया हो, तो उनका नामांकन वैध माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में यदि EVM पर TMC के चुनाव चिन्ह को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, तो जहांगीर खान तकनीकी रूप से जीत का दावा कर सकते हैं।

हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में होगा। आयोग यह तय करेगा कि उम्मीदवार की सार्वजनिक घोषणा को किस हद तक मान्यता दी जाए।

चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव

फालता विवाद के बाद चुनाव आयोग की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि EVM सुरक्षा, वेब कैमरा निगरानी और पुनर्मतदान की प्रक्रिया भविष्य के चुनावों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पर्यवेक्षक भी बंगाल के इस चुनाव को लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनाव प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

क्या फालता बनेगा बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का संकेत?

फालता सीट का परिणाम केवल एक विधानसभा क्षेत्र की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा। यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक संरचना, भाजपा के विस्तार और TMC की चुनौतियों का प्रतीक बन चुका है।

एक ओर भाजपा राज्य में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, वहीं TMC इस सीट को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।

रीपोलिंग, EVM विवाद और उम्मीदवार के पीछे हटने जैसी घटनाओं ने इस चुनाव को बंगाल के सबसे चर्चित राजनीतिक मुकाबलों में शामिल कर दिया है।

अब सबकी नजर मतगणना के अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि फालता में राजनीतिक इतिहास दोहराया जाएगा या नया अध्याय लिखा जाएगा।

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