प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरे लोगों के संघर्षों से सीख लेने की अपील की। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज की ‘रील के युग’ में युवाओं को यह याद रखना चाहिए कि शॉर्टकट उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
PM Modi Special Message Youth: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, को जीवन और करियर में सफलता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ के विमोचन कार्यक्रम में पीएम मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरे लोगों के संघर्षों से सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज का दौर ‘रील’ का है, लेकिन युवाओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि वास्तविक जीवन में सफलता का कोई आसान शॉर्टकट नहीं होता।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि तेजी से लोकप्रिय हो रहे सोशल मीडिया कंटेंट के बीच उन्हें ऐसे जीवन प्रसंगों और किताबों से भी जुड़ना चाहिए, जो धैर्य, संघर्ष और निरंतर प्रयास का महत्व समझाते हैं। उन्होंने कोविंद के जीवन को इसका उदाहरण बताया।
‘रील के दौर’ में शॉर्टकट से बचें युवा
पीएम मोदी ने कहा कि आज सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो का दौर है। लोग कुछ सेकंड में किसी की सफलता देख लेते हैं, लेकिन उस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष अक्सर दिखाई नहीं देता। ऐसे माहौल में युवा जल्द परिणाम हासिल करने के रास्ते तलाश सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘शॉर्ट कट विल कट यू शॉर्ट’ का संदेश दिया। प्रधानमंत्री का कहना था कि जीवन में स्थायी सफलता हासिल करने के लिए मेहनत,अनुशासन और धैर्य जरूरी है। केवल आसान रास्ते की तलाश व्यक्ति को उसके लक्ष्य से दूर कर सकती है।
रामनाथ कोविंद की जिंदगी को बताया प्रेरणादायक
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन को संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति को रोकने के बजाय उसे और मजबूत बना सकती हैं। पीएम मोदी ने कोविंद के बचपन की उस त्रासदी का भी जिक्र किया, जिसमें घर में आग लगने की घटना के दौरान उन्होंने अपनी मां को खो दिया था।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह घटना बेहद दुखद थी, लेकिन कोविंद ने इस कठिनाई को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा कि कोविंद के पिता ने भी उनके व्यक्तित्व और संस्कारों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवाओं को आत्मकथाएं पढ़ने की सलाह

प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मकथाएं केवल किसी व्यक्ति की निजी कहानी नहीं होतीं, बल्कि उनके माध्यम से किसी दौर, समाज और देश के बदलाव को भी समझा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अलग-अलग क्षेत्रों के सफल लोगों की जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। उनके अनुसार, भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो परिस्थितियों से हार न मानें और चुनौती आने पर उसका सामना करने का संकल्प रखें।
राष्ट्रपति पद के बाद भी सक्रिय हैं कोविंद
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पद से कार्यकाल पूरा करने के बाद भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के लिए कोविंद की सराहना की। उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े उनके प्रयासों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सार्वजनिक पद से हटने के बाद भी लोकतंत्र से जुड़े विषयों पर काम करना कोविंद के निरंतर योगदान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन के दिनों को भी किया याद
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन में रामनाथ कोविंद के साथ हुई मुलाकातों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि कोविंद व्यक्तिगत आत्मीयता और सरल व्यवहार के लिए जाने जाते थे। प्रधानमंत्री के मुताबिक, कोविंद कई बार प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। वहीं, रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात स्थित अपने गांव के बचपन को याद किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण जीवन ने उन्हें लोगों के प्रति प्रेम, करुणा और सहयोग की भावना सिखाई।
उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बताया कि बारिश के दिनों में घर की छत से पानी टपकता था और परिवार को बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज सरकारी आवास योजनाओं के जरिए गरीब परिवारों को पक्की छत और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला है।












