‘सिर्फ आज नहीं, कल के भारत की सोचिए’: PM मोदी ने सचिवों की हाईलेवल बैठक में अधिकारियों को दिया दीर्घकालिक सोच का मंत्र

PM Modi ने सचिवों की हाईलेवल बैठक में अधिकारियों से सिर्फ आज नहीं, बल्कि कल के भारत को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने की अपील की। जानें बैठक में क्या संदेश दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर केंद्र सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा, विदेश मामलों तथा शासन व्यवस्था से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के एजेंडे पर विस्तार से चर्चा हुई।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से देश के भविष्य को ध्यान में रखकर काम करने और केवल मौजूदा समस्याओं तक सीमित न रहने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि शासन और नीति निर्माण के दौरान अधिकारियों को आज की चुनौतियों के साथ-साथ आने वाले वर्षों में भारत की जरूरतों और अवसरों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित इस बैठक में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश मामलों और शासन से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के भविष्य के एजेंडे पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और सरकार के कामकाज को अधिक समन्वित, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया।

तत्काल समस्याओं से आगे भविष्य की तैयारी पर जोर

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों से कहा कि नीति निर्माण केवल वर्तमान आंकड़ों, समस्याओं और तात्कालिक जरूरतों के आधार पर नहीं होना चाहिए। देश तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सरकार को भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। उन्होंने अधिकारियों से व्यापक दृष्टिकोण अपनाने और यह सोचने का आग्रह किया कि आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ेगी। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप लगातार खुद को तैयार करना चाहिए।

विभागीय ‘साइलो’ खत्म करने की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी विभागों के बीच अलग-अलग और सीमित दायरे में काम करने की व्यवस्था, जिसे आमतौर पर ‘साइलो’ कहा जाता है, को समाप्त करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि यह केवल संगठनात्मक ढांचे की समस्या नहीं है, बल्कि कई बार सोच और कार्यशैली से भी जुड़ी होती है। उनके अनुसार, विभागों के बीच बेहतर समन्वय के बिना बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करना मुश्किल हो सकता है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से ‘पूरी सरकार एक साथ’ की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया से जुड़े संकटों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय ने बेहतर परिणाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे अनुभवों से सीख लेते हुए सरकारी तंत्र में स्थायी रूप से सहयोग और साझा जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित करने की जरूरत है।

PM मोदी ने डेटा को बताया राष्ट्रीय संपत्ति

बैठक में डेटा के महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि डेटा भविष्य के लिए देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में डेटा जुटाने, उसे सुरक्षित रखने और उसके प्रबंधन पर बड़े संसाधन खर्च करती है, लेकिन अलग-अलग विभागों की प्रणालियां और आपसी तालमेल की कमी के कारण कई बार इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता।

प्रधानमंत्री ने ऐसे बेहतर सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया, जिनके माध्यम से अलग-अलग सरकारी विभागों के डेटा प्लेटफॉर्म जरूरत के अनुसार अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सकें। इससे नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, डेटा के इस्तेमाल में सुरक्षा, जिम्मेदारी और बेहतर प्रबंधन को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया। सरकार का उद्देश्य डेटा को केवल संग्रहित करना नहीं, बल्कि उसे उपयोगी नीतिगत संसाधन के रूप में विकसित करना है।

AI का इस्तेमाल बढ़े, लेकिन मानवीय समझ बनी रहे

प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते महत्व पर भी अधिकारियों से विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि AI की तकनीकी क्षमताओं का उपयोग सरकारी कामकाज और नीति निर्माण को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन अंतिम निर्णयों में मानवीय समझ, अनुभव और जिम्मेदारी की भूमिका बनी रहनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को AI के नए और रचनात्मक उपयोग तलाशने के लिए प्रेरित किया। उनका जोर तकनीक और मानवीय विशेषज्ञता के बीच संतुलन बनाने पर रहा, ताकि आधुनिक उपकरणों का लाभ उठाते हुए फैसलों की संवेदनशीलता और जवाबदेही भी कायम रहे। उन्होंने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच व्यापक संवाद बढ़ाने की जरूरत भी बताई। इससे नीति निर्माण में नए विचारों और अलग-अलग दृष्टिकोणों को शामिल करने का अवसर मिल सकता है।

डिफेंस और समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाने पर चर्चा

बैठक में भारत के रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उपायों पर भी विचार हुआ। प्रधानमंत्री ने आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नए कोर्स विकसित करने और रक्षा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, भारत के समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से संबंधित लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करने और जरूरी योजनाओं को मिशन मोड में आगे बढ़ाने को कहा।

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