कानपुर एक्सप्रेसवे के बाद आउटर रिंग रोड निर्माण में भी PNC पर उठे सवाल, पहले भी मिला था नोटिस

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में PNC इंफ्राटेक पर गुणवत्ता के सवाल उठे। इससे पहले 2024 में NHAI आउटर रिंग रोड पर भी नोटिस दे चुका था।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही पीएनसी इंफ्राटेक पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले 2024 में लखनऊ आउटर रिंग रोड निर्माण के दौरान भी एनएचएआई कंपनी को नोटिस जारी कर चुका था।

लखनऊ: कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवालों के बीच पीएनसी इंफ्राटेक एक बार फिर चर्चा में है। एनएचएआई की ओर से कंपनी को नॉन-परफॉर्मर श्रेणी में डालने की संस्तुति किए जाने के बाद यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 में लखनऊ आउटर रिंग रोड परियोजना के दौरान भी कंपनी को नोटिस जारी किया गया था।

आउटर रिंग रोड परियोजना में भी सामने आई थीं खामियां

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही पीएनसी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर गुणवत्ता संबंधी सवाल पहली बार नहीं उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगस्त 2024 में लखनऊ आउटर रिंग रोड परियोजना के दौरान भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कंपनी को नोटिस जारी किया था। उस समय बेहटा गांव से सीतापुर रोड तक करीब 31.74 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण कार्य में कई कमियां सामने आने की बात कही गई थी।

सूत्रों के अनुसार, उस दौरान ऊंचाहार से लाई जा रही फ्लाई ऐश के परिवहन के दौरान कंपनी के ट्रकों से सड़क को नुकसान पहुंचने की शिकायतें मिली थीं। हालांकि मामला नोटिस तक ही सीमित रहा और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

अब कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण पर भी उठ रहे सवाल

वर्तमान में कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर भी पीएनसी इंफ्राटेक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एनएचएआई ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर श्रेणी में शामिल करने की संस्तुति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजी है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक सप्ताह पहले की गई थी, जिसकी जानकारी एनएचएआई लखनऊ क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने हाल ही में पत्रकार वार्ता के दौरान दी।

दूसरी ओर, पीएनसी इंफ्राटेक ने एनएचएआई को पत्र लिखकर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। फिलहाल कंपनी की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

एनएचएआई पहले भी कई कंपनियों पर कर चुका है कार्रवाई

एनएचएआई के रिकॉर्ड में सड़क निर्माण से जुड़ी गुणवत्ता और देरी के मामलों में पहले भी कई कंपनियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। लखनऊ की 105 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड परियोजना का निर्माण करने वाली डीआर अग्रवाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड पर समय सीमा से अधिक विलंब और गुणवत्ता संबंधी खामियों के कारण लगभग 25 करोड़ रुपये का लिक्विडेटेड डैमेज (एलडी) लगाया गया था।

इसके अलावा सड़क निर्माण में तकनीकी कमियां मिलने पर कंपनी पर 1.22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया था। निरीक्षण के दौरान सीतापुर रोड से कुर्सी रोड के बीच कई स्थानों पर सड़क में गड्ढे और निर्माण संबंधी खामियां मिली थीं। इसी परियोजना से जुड़ी एक अन्य कंपनी सद्भावना इंजीनियर्स लिमिटेड को भी नोटिस जारी किया गया था।

देशभर में कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने का दावा करती है कंपनी

विवादों के बीच पीएनसी इंफ्राटेक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर देश के कई बड़े हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा करने का दावा करती है। कंपनी के अनुसार उसने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और कर्नाटक समेत कई राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है। इसके अलावा कंपनी एयरपोर्ट रनवे, पुल और पावर सेक्टर की परियोजनाओं पर भी कार्य कर रही है।

हालांकि, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और पूर्व में आउटर रिंग रोड परियोजना से जुड़े मामलों ने कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में पीएनसी के परियोजना प्रबंधक वी. कुंडू से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

Leave a comment