आईसीसी के पूर्व अधिकारी समी उल हसन बर्नी ने बीसीसीआई (BCCI) की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए हैं और कहा है कि मुस्तफिजुर रहमान की रिलीज के मामले को सार्वजनिक करने से पाकिस्तान द्वारा भारत से टी20 विश्व कप 2026 में मैच बॉयकॉट करने का विवाद और बढ़ गया।
स्पोर्ट्स न्यूज़: आईसीसी के पूर्व अधिकारी समी उल हसन बर्नी ने बीसीसीआई की कार्यशैली पर कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि अगर बीसीसीआई बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने का आदेश नहीं देता और इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लेता, तो टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान के भारत के खिलाफ मैच बॉयकॉट जैसे विवाद को टाला जा सकता था।
बर्नी ने ICC पर दोहरे मापदंड (double standards) का भी आरोप लगाया, खासकर उस फैसले को लेकर जिसमें बांग्लादेश के भारत में मैच को श्रीलंका शिफ्ट न करने का निर्णय लिया गया।
बीसीसीआई की गलती ने बढ़ाई समस्याएं
पूर्व ICC अधिकारी बर्नी का मानना है कि अगर BCCI बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने का आदेश चुपचाप देती और इसे सार्वजनिक नहीं करती, तो पाकिस्तान का भारत से मैच बॉयकॉट विवाद कभी सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, “अनावश्यक सार्वजनिक बयान और मीडिया में खुलासा स्थिति को और बिगाड़ देता है। कभी-कभी गलत फैसले से ऐसे परिणाम निकलते हैं जिनका असर करोड़ों डॉलर तक हो सकता है।”
बर्नी ने स्पष्ट किया कि 3 जनवरी को जो घोषणा की गई थी, वह इसी तरह की गलती का नतीजा थी। “कभी हम फैसले लेते हैं और तब बिना पूरी स्थिति समझे बयान दे देते हैं। इस वजह से 3 देशों—भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश—को भारी वित्तीय और राजनीतिक असर झेलना पड़ा,” उन्होंने कहा।
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ICC पर दोहरे मापदंड का आरोप
समी उल हसन बर्नी ने पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी के हवाले से कहा कि ICC ने नियमों में निरंतरता बनाए रखने में विफलता दिखाई। नकवी का कहना है कि ICC बांग्लादेश के मैच को भारत से श्रीलंका शिफ्ट न करने के फैसले में पुराने नियमों का पालन नहीं कर रहा। उन्होंने इसे ‘दोहरा मापदंड’ बताया, जहां बड़े देशों के लिए नियम अलग और छोटे देशों के लिए अलग दिखते हैं।
बर्नी ने कहा, यह आसान निर्णय नहीं है। पाकिस्तान ने अपने फैसले से पहले कानूनी और विशेषज्ञ सलाह जरूर ली होगी। लेकिन भारत के खिलाफ एक भी मैच रद्द होने से 2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। पाकिस्तान का वार्षिक क्रिकेट राजस्व लगभग 35.5 मिलियन डॉलर है, इसलिए इसका आर्थिक असर बेहद गंभीर है।
पूर्व ICC अधिकारी ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान ने 2009 से 2019 तक आर्थिक तंगी और घरेलू मैदानों पर क्रिकेट न होने के बावजूद खेला और मजबूती दिखाई। इस दौरान 2009 टी20 विश्व कप और 2017 चैंपियंस ट्रॉफी जैसी उपलब्धियों से पाकिस्तान ने साबित किया कि वे दबाव में भी टिक सकते हैं।










