प्रतापगढ़ जंक्शन पर बिछेगा Ballastless Track, 30 करोड़ की लागत से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार

प्रतापगढ़ जंक्शन की दो लाइनों पर 30 करोड़ रुपये की लागत से बैलास्टलेस ट्रैक बिछेगा। सितंबर से शुरू होने वाले काम से ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा बढ़ेगी।

प्रतापगढ़ जंक्शन की लाइन नंबर एक और तीन पर करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जाएगा। सितंबर से शुरू होने वाले काम से ट्रैक की स्थिरता, सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।

प्रतापगढ़: अमृत भारत स्टेशन के रूप में विकसित हो रहे मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन पर रेलवे ट्रैक का आधुनिकरण किया जा रहा है। स्टेशन की लाइन नंबर एक और तीन पर बिना गिट्टी वाला बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जाएगा। करीब 30 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का काम 15 सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है। इससे ट्रैक की मजबूती बढ़ने के साथ रखरखाव आसान होगा।

प्रतापगढ़ जंक्शन की दो लाइनों पर बदलेगा ट्रैक

मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर अब पारंपरिक गिट्टी वाले ट्रैक की जगह आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने की तैयारी है। रेलवे की योजना के तहत लाइन नंबर एक और तीन पर करीब दो-दो किलोमीटर लंबा ट्रैक तैयार किया जाएगा।

इस परियोजना पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। काम शुरू होने के बाद पहले प्लेटफॉर्म नंबर एक से जुड़ी लाइन पर ट्रैक बिछाया जाएगा। इस दौरान इस लाइन से गुजरने वाली ट्रेनों को आवश्यकता के अनुसार दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर डायवर्ट किया जा सकता है। इसके बाद लाइन नंबर तीन पर काम शुरू किया जाएगा।

ट्रैक निर्माण का काम करीब 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल रेलवे की ओर से तैयारियां की जा रही हैं और 15 सितंबर से काम शुरू होने की उम्मीद है।

बिना गिट्टी वाले ट्रैक से क्या बदलेगा

बैलास्टलेस ट्रैक सामान्य रेलवे ट्रैक से अलग होता है। इसमें पटरियों को गिट्टी के ऊपर रखने के बजाय मजबूत कंक्रीट बेस पर स्थापित किया जाता है। इससे ट्रैक को अधिक स्थिरता मिलती है और गिट्टी के खिसकने या टूटने की समस्या कम होती है।

प्रतापगढ़ जंक्शन पर इस तकनीक के इस्तेमाल से ट्रैक के रखरखाव में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। पारंपरिक ट्रैक में गिट्टी की पैकिंग और उसकी स्थिति को बार-बार ठीक करना पड़ता है, जबकि बैलास्टलेस सिस्टम में इस तरह के रखरखाव की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।

जलभराव और ट्रैक खिसकने की समस्या में मिलेगी राहत

बारिश के दौरान रेलवे ट्रैक के आसपास पानी जमा होने से ट्रैक की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। नई व्यवस्था में कंक्रीट बेस होने के कारण ट्रैक की मजबूती बेहतर रहने की उम्मीद है। इससे जलभराव की स्थिति में लाइन धंसने या ट्रैक के खिसकने जैसी समस्याओं का जोखिम कम किया जा सकेगा।

रेलवे के लिए यह व्यवस्था खासतौर पर उन स्थानों पर उपयोगी मानी जाती है जहां ट्रैक की नियमित मरम्मत करना चुनौतीपूर्ण होता है। बैलास्टलेस ट्रैक को अधिक स्थिर और टिकाऊ व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

तीन दर्जन से ज्यादा ट्रेनों का होता है आवागमन

प्रतापगढ़ जंक्शन ए श्रेणी का महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। यहां से प्रतिदिन करीब तीन दर्जन ट्रेनों का आवागमन होता है। इनमें पंजाब मेल, जनता एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, उद्योग नगरी, मनवर संगम एक्सप्रेस और तुलसी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं।

स्टेशन के विकास और ट्रेनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे की ओर से ट्रैक और प्लेटफॉर्म से जुड़ी सुविधाओं को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। लाइन नंबर एक और तीन पर बैलास्टलेस ट्रैक इसी आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है।

ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा पर भी असर

बैलास्टलेस ट्रैक की मजबूत संरचना ट्रेनों के संचालन के दौरान बेहतर स्थिरता प्रदान कर सकती है। इससे ट्रैक की ज्यामिति लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है और रखरखाव की जरूरत कम हो सकती है।

रेलवे के मुताबिक इस तरह की तकनीक आधुनिक रेल नेटवर्क में इस्तेमाल की जाती है। प्रतापगढ़ जंक्शन पर इसके लागू होने के बाद यात्रियों को अधिक मजबूत और बेहतर रखरखाव वाला ट्रैक मिलने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन की परिचालन क्षमता और ट्रैक की विश्वसनीयता में भी सुधार हो सकता है।

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