पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा भूचाल आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) का गठन किया और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया।
Bengal Election: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक Humayun Kabir ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों की नींद उड़ा दी है। कबीर ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार बंगाल की कुर्सी का रास्ता Murshidabad और Malda के 'बाबरी मस्जिद' वाले इमोशन से होकर गुजरेगा। इस बयान ने राज्य की राजनीति में नया हलचल पैदा कर दी है और आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की संभावना जताई जा रही है।
हुमायूं कबीर का बड़ा राजनीतिक एलान
हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि AJUP पश्चिम बंगाल की 182 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उनका कहना है कि मुस्लिम आबादी लगभग 30% है और यह वोट बैंक अब केवल TMC के लिए नहीं बल्कि AJUP और AIMIM के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगा। कबीर ने ममता बनर्जी पर सीधे हमला बोलते हुए कहा:
'TMC ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक माना, उन्हें उनका वाजिब हक नहीं दिया। अगर वे गंभीर होते, तो कम से कम 90-100 मुस्लिम उम्मीदवार उतारते, लेकिन उन्होंने केवल 47 उम्मीदवारों को टिकट दिया।'
कबीर के अनुसार, पश्चिम बंगाल की राजनीति में AJUP का समर्थन किसी भी सरकार के गठन के लिए अहम होगा। उनका यह भी दावा है कि बिना AJUP के समर्थन के कोई भी दल बहुमत हासिल नहीं कर पाएगा।
‘बाबरी मस्जिद’ मुद्दा चुनावी हथियार

हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई मस्जिद बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इसे ‘मरहम’ बताया और दावा किया कि यदि 100 मुस्लिम वोट डाले जाएंगे, तो 80 वोट उनकी पार्टी को मिलने की संभावना है। कबीर ने अपने चुनावी रणनीति के तहत भवानीपुर सीट से पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है, जो सीधे ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।
AJUP और AIMIM के गठबंधन का मकसद स्पष्ट है: मुस्लिम नेतृत्व और समुदाय के मुद्दों को मुख्यधारा में लाना। AIMIM पश्चिम बंगाल में पहले भी राजनीतिक सक्रियता दिखा चुकी है, लेकिन इस बार AJUP के साथ मिलकर वह राजनीतिक गणित बदलने की कोशिश कर रही है। हुमायूं कबीर का गणित सीधा है:
- पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी = लगभग 30%
- AJUP के समर्थन के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी
- प्रमुख मुस्लिम वोट AJUP और AIMIM को मिल सकते हैं
कबीर का कहना है कि उनका गठबंधन सिर्फ वोट बैंक तक सीमित नहीं, बल्कि मुस्लिम नेतृत्व और उनके अधिकारों की राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास है।










