पटना के कन्या मध्य विद्यालय में कक्षा पांच की छात्रा की जलने से मौत के मामले में प्रधानाध्यापक प्रेमलता कुमारी को निलंबित कर दिया गया। जिलाधिकारी ने घटना को गंभीर लापरवाही बताया और पुलिस जांच शुरू कर दी।
पटना: बिहार के पटना में गर्दनीबाग स्थित कन्या मध्य विद्यालय में कक्षा पांच की एक छात्रा की जलने से मौत के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने शुक्रवार को बताया कि स्कूल की प्रिंसिपल प्रेमलता कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने इसे “एक आपराधिक लापरवाही” करार दिया और कहा कि इस घटना की पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
डीएम ने स्पष्ट किया कि विद्यालय परिसर में हुई यह दुखद घटना प्रधानाध्यापक की लापरवाही, नियंत्रण की कमी और असंवेदनशीलता को दर्शाती है। प्रशासन ने शिक्षा विभाग को निलंबित प्रिंसिपल के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने का निर्देश भी दिया है।
छात्रा ने स्कूल में खुद को आग लगाई
सूत्रों के अनुसार, बुधवार (27 अगस्त, 2025) को छात्रा ने स्कूल के बाथरूम में खुद को आग लगा ली थी। उसे तत्काल पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, लेकिन शाम तक उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए।
गुरुवार (28 अगस्त) को परिजन और ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए आगजनी और हंगामा किया। परिजन का कहना था कि बच्ची ने खुद को आग नहीं लगाई, बल्कि स्कूल के मास्टरों द्वारा उसे जलाया गया।
आरोप पत्र जारी करने का निर्देश
जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि आधिकारिक दायित्वों में शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके तहत प्रिंसिपल प्रेमलता कुमारी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत निलंबित किया गया।
निलंबन अवधि में प्रिंसिपल को मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, फुलवारी शरीफ कार्यालय में रखा गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी को आरोप पत्र निर्गत करने का भी निर्देश दिया गया है।
बच्चों की सुरक्षा प्राथमिक जिम्मेदारी
जिलाधिकारी ने बताया कि पुलिस जांच जारी है और जल्द ही सभी तथ्यों की पुष्टि कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आगाह किया कि विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिक दायित्व है। इस घटना ने शिक्षा विभाग और समाज में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यालयों में सुरक्षा मानकों का पालन, बच्चों के लिए उचित देखरेख और सतर्कता सुनिश्चित करना अनिवार्य है।