वाराणसी में साइबर ठगों ने पुलवामा आतंकी हमले का हवाला देकर एक वरिष्ठ प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाने की कोशिश की, लेकिन समय रहते सतर्कता बरतने से बड़ा नुकसान टल गया। पीड़ित की पत्नी की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से प्रोफेसर ठगी का शिकार होने से बच गए।
जानकारी के अनुसार, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व कॉमर्स फैकल्टी के अध्यक्ष रहे डॉ. गुलाब चंद्र जायसवाल को अज्ञात नंबर से कॉल कर खुद को एटीएस और पुलिस अधिकारी बताने वाले ठगों ने डराने की कोशिश की। ठगों ने दावा किया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पुलवामा हमले से जुड़े मामले में हुआ है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से बैंक खातों समेत अन्य संवेदनशील जानकारी मांगी गई।
डॉ. जायसवाल के घर पहुंचने पर उनकी पत्नी डॉ. ऋचा जायसवाल ने पूरे घटनाक्रम को समझा और तत्काल राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल से संपर्क किया। मंत्री ने इसे साइबर ठगी का मामला बताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी। इसके बाद ठगों से संपर्क तोड़ दिया गया और किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं की गई।
घटना के संबंध में पीड़ित ने सिगरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने लोगों से अपील की है कि देश में कहीं भी डिजिटल थाना या डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस कभी भी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती। उन्होंने नागरिकों से साइबर ठगों से सावधान रहने और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना पुलिस को देने की अपील की है।












