पुणे लैंड डील विवाद: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार बोले - 'अंतरात्मा की आवाज़ सुनूंगा, फिर फैसला लूंगा'

पुणे लैंड डील विवाद: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार बोले - 'अंतरात्मा की आवाज़ सुनूंगा, फिर फैसला लूंगा'

महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार ने बुधवार को कहा कि वह अपने बेटे की कंपनी से जुड़े कथित पुणे लैंड डील विवाद के मामले में अपनी “अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर फैसला लेंगे। यह बयान उस समय आया जब सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने उनसे इस्तीफ़े की मांग की।

पुणे: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने बेटे की कंपनी से जुड़े एक संदिग्ध जमीन सौदे को लेकर मचे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। एक कार्यकर्ता द्वारा उनके इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद अजित पवार ने बुधवार को कहा कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही निर्णय लेंगे। बताया जा रहा है कि उनके बेटे पार्थ पवार से जुड़ी एक निजी कंपनी पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित एक सरकारी भूखंड से संबंधित 300 करोड़ रुपये के सौदे के केंद्र में है। हालांकि इस सौदे को अब रद्द कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला

पुणे के मुंधवा क्षेत्र में स्थित एक सरकारी भूमि के 300 करोड़ रुपये के सौदे को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। यह सौदा अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी एक निजी कंपनी ने किया था। बाद में खुलासा हुआ कि जिस जमीन पर यह डील हुई, वह वास्तव में सरकारी स्वामित्व वाली थी। विपक्ष और नागरिक समाज के दबाव के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने इस सौदे को रद्द कर दिया और मामले की जांच के लिए राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। यह कमेटी एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

अजित पवार का जवाब: “मेरी अंतरात्मा मेरा मार्गदर्शन करेगी”

जब पत्रकारों ने उनसे अंजलि दमानिया द्वारा की गई इस्तीफे की मांग पर सवाल पूछा, तो अजित पवार ने कहा, मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर फैसला लूंगा। उन्होंने कहा कि पार्थ पवार और उनके कारोबारी साझेदार को यह जानकारी नहीं थी कि संबंधित भूमि सरकारी है। पवार ने दावा किया कि जब यह तथ्य सामने आया, तब तुरंत कार्रवाई करते हुए सौदा रद्द कर दिया गया और संबंधित दस्तावेज़ों का रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि “इस पूरे सौदे में एक भी रुपया लेन-देन नहीं हुआ है। हमने अधिकारियों को हलफनामा सौंप दिया है ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

राज्य सरकार की कार्रवाई 

महाराष्ट्र सरकार ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि किसी भी सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े लेन-देन की पारदर्शिता अनिवार्य है। राज्य के राजस्व विभाग ने इस पूरे प्रकरण की प्रशासनिक और वित्तीय जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह समिति जमीन आवंटन, स्वामित्व और पंजीकरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी। रिपोर्ट आने के बाद तय किया जाएगा कि आगे कौन-सी कार्रवाई की जानी है।

अजित पवार ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्होंने कभी भी सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा, हमने न कभी सत्ता का गलत इस्तेमाल किया है और न ही अहंकार किया। सत्ता का दुरुपयोग ज़्यादा दिन नहीं चलता। जनता हमें आठ लाख वोटों से इसलिए चुनती है क्योंकि हम उनके लिए ईमानदारी से काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष को तथ्यों के बिना आरोप लगाने से बचना चाहिए। “यह पूरी तरह से एक तकनीकी त्रुटि थी, न कि कोई भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी का मामला,” उन्होंने जोड़ा।

विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने इस सौदे को “नीतिगत विफलता और हितों के टकराव” का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि एक उपमुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी का सरकारी भूमि में सौदा करना नैतिक रूप से अनुचित है।
दमानिया ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक अजित पवार को पद छोड़ देना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके।

वहीं विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात कही है। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। दिल्ली में हाल ही में हुए 10 नवंबर के कार विस्फोट के संदर्भ में एक सवाल पर अजित पवार ने बताया कि मंगलवार को मुंबई में सुरक्षा समीक्षा बैठक हुई थी और राज्य को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 

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