राहुल गांधी पर बीजेपी का सोशल मीडिया अभियान तेज, मीम्स और वीडियो से बढ़ी सियासी जंग

राहुल गांधी को लेकर बीजेपी की राज्य इकाइयो ने सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो अभियान तेज। कांग्रेस ने सवाल उठाए, जबकि प्रह्लाद जोशी ने ‘झूठ की गूंज’ से संबंध

राहुल गांधी को लेकर बीजेपी की विभिन्न राज्य इकाइयों ने सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो जारी कर अभियान तेज किया है। कांग्रेस ने इसे बीजेपी की रणनीति बताया, जबकि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट से पार्टी का संबंध नकार दिया।

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी अब सोशल मीडिया पर भी तेज होती दिखाई दे रही है। बीजेपी की विभिन्न राज्य इकाइयों की ओर से पिछले कुछ दिनों में राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कई मीम्स, छोटे वीडियो और रचनात्मक पोस्ट साझा किए गए हैं। इस डिजिटल अभियान के केंद्र में राहुल गांधी के सार्वजनिक बयानों, कांग्रेस की राजनीति और कथित तौर पर गलत जानकारी के प्रसार से जुड़े बीजेपी के आरोप हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर चल रहे इस अभियान को बीजेपी की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हालांकि ‘झूठ की गूंज’ नाम की वेबसाइट से बीजेपी का संबंध होने से इनकार किया है।

रक्षाबंधन की तस्वीर के बाद शुरू हुआ विवाद

विवाद की एक कड़ी रक्षाबंधन के अवसर पर राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी की सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर से जुड़ी है। राहुल गांधी ने तस्वीर पोस्ट करते हुए भाई-बहन के रिश्ते को प्रेम और विश्वास से जोड़ते हुए देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी थीं।

तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि तस्वीर में राहुल गांधी को प्रियंका गांधी से राखी बंधवाते हुए क्यों नहीं दिखाया गया।

यह चर्चा उस समय और बढ़ गई जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से राहुल गांधी को लेकर एक चुनौती का जिक्र सामने आया। इसके बाद सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक पुराना वीडियो भी शेयर किया गया, जिसमें प्रियंका गांधी उनकी बांह पर काली पट्टी बांधती दिखाई देती हैं।

हालांकि, इस सोशल मीडिया बहस को राजनीतिक अभियान का हिस्सा मानने से पहले संबंधित पोस्ट और वीडियो के संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है।

‘झूठ की गूंज’ से शुरू हुआ नया डिजिटल अभियान

राहुल गांधी को लेकर बीजेपी समर्थित सोशल मीडिया नैरेटिव में ‘झूठ की गूंज’ नाम की वेबसाइट और उससे जुड़े कंटेंट की भी चर्चा हुई। वेबसाइट ने राहुल गांधी के कुछ कार्यक्रमों में किए गए दावों की तथ्य-जांच करने का दावा किया।

वेबसाइट के अनुसार, राहुल गांधी के चार कार्यक्रमों में किए गए 40 दावों की जांच की गई। इनमें 29 दावों को पूरी तरह गलत और 11 को भ्रामक बताया गया। वेबसाइट ने अपने आकलन के लिए सरकारी आंकड़ों समेत 134 स्रोतों का इस्तेमाल करने का दावा किया।

हालांकि, इन दावों और वेबसाइट की कार्यप्रणाली को लेकर स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। किसी वेबसाइट द्वारा किसी बयान को गलत या भ्रामक बताए जाने मात्र से वह निष्कर्ष स्वतः अंतिम तथ्य नहीं बन जाता। राजनीतिक दावों की पुष्टि के लिए मूल स्रोत, आधिकारिक आंकड़े और स्वतंत्र फैक्ट-चेक को भी देखना महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस ने बीजेपी से जोड़ा अभियान

‘झूठ की गूंज’ अभियान सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे बीजेपी से जोड़कर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के साथ युवाओं का जुड़ाव बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन गया है और सोशल मीडिया के माध्यम से एक अलग नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी बीजेपी पर राहुल गांधी को लेकर लगातार राजनीतिक हमले करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है।

दूसरी तरफ, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने अभियान को राजनीतिक और वैचारिक जवाब के रूप में पेश किया है।

प्रह्लाद जोशी बोले- बीजेपी का वेबसाइट से संबंध नहीं

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट से बीजेपी के सीधे संबंध से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि यह प्लेटफॉर्म Gen Z क्रिएटर्स से जुड़ा है और उसने राहुल गांधी के कथित पीआर अभियान की पड़ताल की है।

जोशी ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस को वेबसाइट द्वारा किए गए फैक्ट-चेक पर आपत्ति है तो उसे संबंधित दावों का जवाब तथ्यों के साथ देना चाहिए। इस बयान के बाद वेबसाइट की स्वतंत्रता और उसके पीछे मौजूद लोगों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

अलग-अलग राज्यों की बीजेपी इकाइयां मैदान में

पिछले कुछ दिनों में बीजेपी की अलग-अलग राज्य इकाइयों ने राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना बनाने के लिए अलग-अलग तरह के वीडियो और मीम्स का इस्तेमाल किया है। इन पोस्ट में फिल्मों, टीवी कार्यक्रमों और लोकप्रिय डिजिटल कंटेंट के दृश्यों को राजनीतिक संदेशों के साथ जोड़ा गया।

बीजेपी गोवा की इकाई ने लोकप्रिय टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की एक क्लिप का इस्तेमाल किया। इसी तरह बीजेपी महाराष्ट्र ने फिल्म ‘छावा’ के एक दृश्य को अपने राजनीतिक संदेश के साथ साझा किया।

छत्तीसगढ़ बीजेपी ने वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ के एक किरदार की छोटी वीडियो क्लिप के जरिए ‘दिमागी नक्सल’ जैसे राजनीतिक शब्द का इस्तेमाल किया। इस तरह के कंटेंट का उद्देश्य लंबे राजनीतिक भाषण के बजाय छोटे और तेजी से वायरल होने वाले वीडियो के जरिए सोशल मीडिया यूजर्स तक संदेश पहुंचाना दिखाई देता है।

गुजरात से जम्मू-कश्मीर तक वीडियो कैंपेन

बीजेपी गुजरात की इकाई ने अभिनेता अजय देवगन और सलमान खान से जुड़े फिल्मी किरदारों की वीडियो क्लिप का इस्तेमाल किया। इसमें ‘सिंघम’ और ‘चुलबुल पांडे’ जैसे लोकप्रिय किरदारों को एक साथ दिखाया गया।

जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने भी सलमान खान से जुड़े एक कार्यक्रम की क्लिप साझा की। पोस्ट में बीजेपी की अलग-अलग राज्य इकाइयों को एक टीम के रूप में प्रस्तुत करते हुए राजनीतिक संदेश दिया गया।

बीजेपी दिल्ली की इकाई ने ‘मिर्जापुर’ से जुड़ी एक अन्य छोटी क्लिप का इस्तेमाल किया। वहीं राजस्थान बीजेपी की ओर से एक लॉयन सफारी की क्लिप साझा की गई, जिसमें शेर और नकाब से जुड़े दृश्य को राजनीतिक संदेश के साथ जोड़ा गया।

कर्नाटक बीजेपी ने फिल्म ‘KGF’ की क्लिप का इस्तेमाल किया। इन सभी पोस्ट में एक समान पैटर्न नजर आया—कम अवधि के लोकप्रिय वीडियो, फिल्मी संदर्भ और छोटे राजनीतिक संदेश।

बीजेपी ने बताया कांग्रेस को जवाब देने की रणनीति

बीजेपी राजस्थान के सोशल मीडिया इंचार्ज हीरेंद्र कौशिक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कथित तौर पर गलत या फर्जी आंकड़ों के जरिए अपना राजनीतिक नैरेटिव तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सोशल मीडिया टीम अब कांग्रेस को उसी माध्यम और भाषा में जवाब दे रही है।

बीजेपी की केंद्रीय आईटी सेल की ओर से भी एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें केंद्रीय टीम के साथ विभिन्न राज्यों की आईटी इकाइयों को दिखाया गया। इसमें ‘दिमागी नक्सल’ के खिलाफ अभियान का संदेश दिया गया।

यह पूरा अभियान यह संकेत देता है कि बीजेपी राहुल गांधी के राजनीतिक बयानों का जवाब पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस और भाषणों के साथ-साथ सोशल मीडिया के छोटे और तेजी से फैलने वाले कंटेंट के माध्यम से देने की रणनीति पर जोर दे रही है।

सोशल मीडिया बना राजनीतिक लड़ाई का बड़ा मैदान

भारत में चुनावी और राजनीतिक संचार में सोशल मीडिया की भूमिका पिछले एक दशक में काफी बढ़ी है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म राजनीतिक दलों के लिए सीधे मतदाताओं और समर्थकों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।

बीजेपी ने शुरुआती दौर में डिजिटल प्रचार को तेजी से अपनाया और पार्टी की आईटी तथा सोशल मीडिया मशीनरी को मजबूत किया। बाद में कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी सक्रियता बढ़ाई।

अब राजनीतिक दल केवल घोषणापत्र, भाषण और प्रेस विज्ञप्ति तक सीमित नहीं हैं। मीम्स, शॉर्ट वीडियो, वायरल क्लिप और ग्राफिक्स भी राजनीतिक संदेशों का हिस्सा बन चुके हैं।

व्यक्तिगत हमलों और नैरेटिव की राजनीति पर सवाल

सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस के बढ़ने के साथ व्यक्तिगत हमलों और भ्रामक जानकारी के प्रसार को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। छोटे वीडियो और मीम्स तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं, लेकिन कई बार उनमें संदर्भ सीमित होता है।

ऐसे में किसी भी राजनीतिक दावे या वायरल वीडियो को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत और संदर्भ की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर जब किसी नेता के बयान को गलत, भ्रामक या फर्जी बताया जा रहा हो, तब स्वतंत्र स्रोतों से तथ्य की पुष्टि करना जरूरी है।

आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है डिजिटल जंग

राहुल गांधी को लेकर बीजेपी की राज्य इकाइयों द्वारा लगातार पोस्ट किए जाने से साफ है कि दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा और तेज हो रही है। बीजेपी अपने डिजिटल अभियान को अधिक आक्रामक और मनोरंजक बनाने की कोशिश करती दिख रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव और नैरेटिव बदलने की कोशिश के रूप में देख रही है।

आने वाले समय में सोशल मीडिया पर यह टकराव और बढ़ सकता है। खासकर राहुल गांधी के सार्वजनिक कार्यक्रमों, राजनीतिक बयानों और कांग्रेस के अभियानों के जवाब में बीजेपी की आईटी टीमें नए मीम्स और वीडियो जारी कर सकती हैं।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव बनाने और विपक्ष के खिलाफ जवाबी अभियान चलाने का प्रमुख मंच बन चुका है।

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