राजस्थान के निकाय प्रमुखों को 100 दिन का रोडमैप बनाने के निर्देश, दिवाली से पहले बुनियादी सुविधाएं सुधारने पर जोर

सीएम भजनलाल शर्मा ने राजस्थान के शहरी निकायों को 100 दिन का रोडमैप बनाने के निर्देश दिए। दिवाली से पहले सफाई, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट सुधार पर जोर।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शहरी निकाय प्रमुखों को 100 दिन का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दिवाली से पहले सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और जल निकासी से जुड़े जरूरी कार्य पूरे करने पर विशेष जोर दिया गया है।

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के शहरी स्थानीय निकायों के नवनिर्वाचित मेयरों, अध्यक्षों और अन्य जनप्रतिनिधियों को शहरों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 100 दिन का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ-साथ आम लोगों से जुड़ी बुनियादी समस्याओं का तत्काल समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को अपने आवास पर शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले सफाई, सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, नालियों और शहरों के सौंदर्यीकरण से जुड़े जरूरी काम पूरे किए जाएं। उन्होंने विकास योजनाओं की नियमित निगरानी और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

दिवाली से पहले जरूरी नागरिक सुविधाओं पर फोकस

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि त्योहारों के दौरान शहरों में लोगों की आवाजाही बढ़ती है, इसलिए सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति बेहतर रखना जरूरी है। उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों को सफाई व्यवस्था, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, बिजली, सीवरेज और जल निकासी जैसी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों से कहा कि इन कार्यों की केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी प्रगति की लगातार समीक्षा भी की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्थानीय स्तर पर नियमित निरीक्षण से समस्याओं की पहचान जल्दी की जा सकती है और उनके समाधान में होने वाली देरी को कम किया जा सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े ऐसे कार्य, जिन्हें तत्काल पूरा किया जा सकता है, उन्हें एक महीने के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाए।

कचरा और जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान पर जोर

शहरी क्षेत्रों में साफ-सफाई और जल निकासी से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने निकाय प्रमुखों को निर्देश दिए। उन्होंने कचरा संग्रहण और उसके उचित निस्तारण, जलभराव, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति में सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा।

इसके अलावा पार्कों के रखरखाव, आवारा पशुओं और अतिक्रमण जैसी स्थानीय समस्याओं के समाधान को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित दौरा करने और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं के समाधान की निगरानी करने को कहा।

शहरी प्रशासन के स्तर पर इन मुद्दों का असर सीधे नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। ऐसे में सरकार की ओर से समयबद्ध कार्रवाई पर जोर को स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

पूरे शहर को ध्यान में रखकर बने विकास की योजना

मुख्यमंत्री ने केवल वार्ड स्तर पर विकास योजनाएं बनाने के बजाय पूरे शहर को एक इकाई मानकर बुनियादी ढांचे की योजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क, सीवरेज और अन्य शहरी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे-छोटे काम कराने के साथ-साथ शहर की समग्र जरूरतों को ध्यान में रखकर चरणबद्ध योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। इससे शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है और संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल संभव होगा।

100 दिन का रोडमैप इसी व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य स्थानीय निकायों के स्तर पर प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना और विकास कार्यों के लिए समयसीमा निर्धारित करना है।

निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और राजस्व बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि नागरिक सुविधाओं और विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की आवश्यकता बताई। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।

स्थानीय निकायों के लिए पर्याप्त राजस्व महत्वपूर्ण है, क्योंकि शहरों में सड़क, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के संचालन एवं रखरखाव पर लगातार खर्च होता है। ऐसे में राजस्व बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन सुधारने को शहरी प्रशासन की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं से जोड़ा गया है।

शहरी क्षेत्रों में 125 दिन के रोजगार का उल्लेख

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की शहरी रोजगार पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पात्र लोगों को शहरी क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकार की ओर से शहरी स्थानीय निकायों में रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बैठक में शहरी प्रशासन से जुड़े विभिन्न कार्यों और योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के 188 शहरी स्थानीय निकायों में मुफ्त डी-स्लजिंग सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ एफएसटीपी यानी फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधाएं भी उपलब्ध होने की बात कही गई।

डी-स्लजिंग और फीकल स्लज प्रबंधन शहरी स्वच्छता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन सुविधाओं का उद्देश्य सीवेज और सेप्टिक टैंक से निकलने वाले स्लज के सुरक्षित प्रबंधन को बेहतर बनाना है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी विकास से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने रखने और समाधान की प्रगति पर नजर रखने को कहा।

बैठक में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कई महापौर और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया, जबकि अन्य प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।

100 दिन की योजना से क्या उम्मीद

राजस्थान सरकार का 100 दिन का रोडमैप शहरी निकायों के लिए तत्काल और मध्यम अवधि की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने पर केंद्रित है। इसका पहला चरण दिवाली से पहले दिखाई देने वाले बुनियादी सुधारों पर केंद्रित रहेगा, जबकि व्यापक विकास योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना है।

सड़क, सफाई, जल निकासी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक स्थानों से जुड़े कार्य सीधे नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं। ऐसे में इन कार्यों की समयबद्ध निगरानी और जवाबदेही यह तय करने में अहम होगी कि 100 दिन का रोडमैप जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है।

राज्य सरकार की ओर से वित्तीय मजबूती, राजस्व वृद्धि, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को भी इस शहरी प्रशासनिक एजेंडे का हिस्सा बनाया गया है। आने वाले दिनों में निकायों की ओर से तैयार किए जाने वाले रोडमैप और उनकी प्रगति यह बताएगी कि इन लक्ष्यों को किस तरह लागू किया जाता है।

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