राजस्थान में बढ़ा प्रदूषण स्तर: इन दो जिलों में लागू हुआ GRAP-3, कई गतिविधियों पर लगी सख्त पाबंदियां

राजस्थान में बढ़ा प्रदूषण स्तर: इन दो जिलों में लागू हुआ GRAP-3, कई गतिविधियों पर लगी सख्त पाबंदियां

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिलों में भी अब कड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है।

जयपुर। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रैप-3 (GRAP-3) लागू कर दिया है। इसका असर अब राजस्थान के एनसीआर से जुड़े जिलों अलवर और भरतपुर में भी देखने को मिलेगा। दोनों जिलों में अब बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा। केवल आवश्यक वस्तुओं से जुड़े मालवाहक वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति होगी। 

इसके अलावा निर्माण कार्यों, धूल उड़ाने वाली औद्योगिक गतिविधियों और डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है, क्योंकि हाल के दिनों में एनसीआर के साथ राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी AQI लगातार “गंभीर”श्रेणी में दर्ज किया गया है।

राजस्थान में सर्दी और स्मॉग की दोहरी मार

राजस्थान में सर्दी और प्रदूषण दोनों का असर तेज हो गया है। बीते 24 घंटे में नौ शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि फतेहपुर सबसे ठंडा रहा—6.9 डिग्री पर। वहीं राजधानी जयपुर का न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री रहा। दूसरी ओर, भिवाड़ी का एक्यूआइ 380 तक पहुंच गया, जो  गंभीर श्रेणी में है, जबकि अलवर में 120 दर्ज हुआ है। दिल्ली-एनसीआर की तरह अब राजस्थान के इन जिलों में भी ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू रहेंगी ताकि प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर नियंत्रण रखा जा सके।

निजी और सार्वजनिक वाहनों पर रोक

ग्रैप-3 लागू होने के साथ ही अब अलवर और भरतपुर में निजी बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रदूषण नियंत्रण के तहत दिल्ली और एनसीआर से आने-जाने वाले ऐसे वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाहरी राज्यों की डीजल बसों को भी एनसीआर की सीमाओं में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इन जिलों में केवल आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी मालवाहक गाड़ियां ही चल सकेंगी। प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए आमजन से सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों या साझा सफर का इस्तेमाल करने की अपील की है।

निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर असर

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए गैर जरूरी निर्माण गतिविधियां पूरी तरह रोक दी गई हैं। इसमें बिल्डिंग प्रोजेक्ट, सड़क निर्माण, स्टोन क्रशर और खनन से जुड़ा काम शामिल है। साथ ही सीमेंट, बालू और अन्य निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की आवाजाही भी बंद रहेगी।

इसके अलावा, सभी कंपनियों और निजी दफ्तरों को वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मोड में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।

स्कूल बंद, ऑनलाइन क्लासेस शुरू

प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए क्लास 5 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि छोटे बच्चों का स्वास्थ्य प्रदूषित हवा में सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, इसलिए ये कदम एहतियातन उठाया गया है।

शिक्षा विभाग ने स्कूल संचालकों को डिजिटल माध्यम से क्लास लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने भी बच्चों और बुजुर्गों को बिना जरूरत बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

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