राजस्थान यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में अचानक छत का प्लास्टर गिरने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए जर्जर भवनों की मरम्मत और बेहतर सुरक्षा इंतजाम की मांग की।
जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में बुधवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब लाइब्रेरी की छत का प्लास्टर अचानक टूटकर छात्रों की बेंच पर गिर पड़ा। घटना उस समय हुई जब लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा, वहां कुछ मिनट पहले तक छात्र बैठे थे और घटना के समय कोई मौजूद नहीं था।
इस घटना के बाद छात्रों में दहशत और नाराजगी दोनों देखने को मिली। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और कैंपस में जर्जर इमारतों की तत्काल मरम्मत की मांग उठाई।
दोपहर में हुआ हादसा, लाइब्रेरी में मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, यह घटना बुधवार दोपहर करीब 3 बजे हुई। उस समय सेंट्रल लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं और विश्वविद्यालय की पढ़ाई की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक छत से प्लास्टर टूटकर नीचे गिरा, जिससे लाइब्रेरी में अफरा-तफरी मच गई। तेज आवाज सुनते ही छात्र अपनी सीटों से उठकर बाहर की ओर भागने लगे।
हालांकि किसी छात्र को चोट नहीं आई, लेकिन घटना ने विश्वविद्यालय की इमारतों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ जताया विरोध
घटना के तुरंत बाद नाराज छात्र लाइब्रेरी प्रशासन और विभागाध्यक्ष (HOD) के कार्यालय पहुंचे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से यूनिवर्सिटी की जर्जर इमारतों, खराब रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य कराया जाता, तो इस तरह की घटना नहीं होती।
छात्राओं ने बताया- कुछ देर पहले वहीं बैठी थीं छात्राएं
छात्रा वियोना जाट ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजस्थान यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र रोज पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन यहां की इमारतें अब खुद असुरक्षित हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि जिस टेबल पर प्लास्टर गिरा, वहां कुछ ही देर पहले छात्राएं बैठकर पढ़ाई कर रही थीं। यदि हादसा कुछ मिनट पहले होता, तो कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो सकते थे।
वियोना ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि कैंपस की सभी जर्जर इमारतों का जल्द सर्वे कराया जाए और आवश्यक मरम्मत कार्य तुरंत शुरू किया जाए।

भीषण गर्मी में छात्रों को मूलभूत सुविधाओं की कमी
छात्रों का कहना है कि इस समय जयपुर में भीषण गर्मी पड़ रही है और यूनिवर्सिटी में पीने के पानी, कूलर, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं की भी कमी है।
उनका आरोप है कि लाइब्रेरी और अन्य भवनों में रखरखाव की स्थिति बेहद खराब है। कई स्थानों पर दीवारों और छतों में दरारें दिखाई देती हैं, लेकिन प्रशासन इन समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।
छात्रों ने अंबेडकर लाइब्रेरी के बंद पड़े हॉल को दोबारा शुरू करने की भी मांग की ताकि छात्रों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
छात्र नेताओं ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
छात्र नेता भारत भूषण यादव ने कैंपस पहुंचकर घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि सेंट्रल लाइब्रेरी में छत का प्लास्टर गिरना प्रशासन की गंभीर लापरवाही का उदाहरण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उनके अनुसार, यदि उस समय कोई छात्र वहां मौजूद होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
भारत भूषण ने कहा कि राजस्थान की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
जर्जर भवनों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
राजस्थान यूनिवर्सिटी की कई इमारतों की हालत को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि पुराने भवनों में नियमित रखरखाव और संरचनात्मक निरीक्षण की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मरम्मत नहीं होने और मौसम के प्रभाव के कारण पुरानी इमारतों में प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरार आने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
हाल के वर्षों में देश के कई हिस्सों में स्कूल और कॉलेज भवनों के जर्जर होने के कारण हादसे सामने आ चुके हैं, जिसके बाद शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर बढ़ा दबाव
घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि कैंपस की सभी इमारतों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और असुरक्षित हिस्सों को तुरंत बंद किया जाए।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
विशेषज्ञ बोले- नियमित ऑडिट जरूरी
निर्माण और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने शैक्षणिक भवनों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट होना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित निरीक्षण से कमजोर हिस्सों की पहचान समय रहते की जा सकती है और बड़े हादसों को रोका जा सकता है।












