अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है। गणना कर्मियों ने चोरी का वीडियो और जानकारी चंपत राय तक पहुंचाई, जिसके बाद बाथरूम से सवा दो लाख रुपये बरामद हुए।
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दाखिल पुलिस की चार्जशीट से सामने आया है कि गणना कर्मियों ने ही चोरी का राज खोला था। चार जून को तत्कालीन महासचिव चंपत राय को दो मोबाइल नंबरों से वीडियो और मैसेज भेजे गए, जिसमें बाथरूम में छिपी नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं। जांच में 67 गणना कर्मियों के चोरी में शामिल होने की बात सामने आई।
कैश काउंटिंग कर्मियों ने खोला राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला
राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। चार्जशीट में घटना से जुड़े घटनाक्रम, गणना कक्ष में कथित चोरी और बाद में रकम बरामद होने का सिलसिलेवार विवरण दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले का खुलासा गणना कर्मियों की सूचना के बाद हुआ।

इन्हीं कर्मियों ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय तक चोरी से जुड़ा पहला वीडियो और मैसेज पहुंचाया था। चार जून को चंपत राय दिल्ली से अयोध्या लौट रहे थे, तभी उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो और लिखित संदेश मिले। वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं। संदेश में बताया गया था कि चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान चोरी हो रही है और इसमें 67 लड़कों के शामिल होने की जानकारी दी गई थी।
बाथरूम में छिपाई गई थी चोरी की रकम
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, चोरी की रकम करीब सवा दो लाख रुपये थी, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ गणना कर्मियों पर कई दिनों से चढ़ावे की रकम चोरी करने का आरोप था। पांच मई को चंपत राय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र, गोपाल राव और नरेंद्र पहुंचे थे।
इस दौरान नरेंद्र के लैपटॉप से कुछ वीडियो दिखाए गए। इन वीडियो में गणना कक्ष में दान और चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कुछ कर्मियों को रुपये चोरी करते हुए दिखाया गया था।
गवाह ने पुलिस को बताई गणना कक्ष की घटना
गवाह आनंद चौधरी के मुताबिक, चार जून को ड्यूटी समाप्त होने के बाद उन्हें गणना कक्ष में मौजूद बैंक और ट्रस्ट के कुछ कर्मियों ने रोक लिया था। इनमें बैंक की ओर से सत्या, ट्रस्ट के विनय श्रीवास्तव और गणना कर्मी मदन गोपाल निगम, आकाश गौड़ तथा रितिक सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे।
एक अन्य कर्मी ने पुलिस को बताया कि तीन जून को उसकी डे कैश काउंटिंग की दूसरी पाली थी। उसके साथ करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, अविनाश शुक्ल और अनुकल्प मिश्र काम कर रहे थे। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे में मिले रुपये चोरी से उठाकर पहले मेज के नीचे और फिर अपनी कमर में छिपा रहे थे।
चार जून को अविनाश को कथित तौर पर चोरी करते हुए संत प्रसाद वर्मा ने देख लिया। इसके बाद कुछ कर्मी बाथरूम के पीछे जाकर आपस में बातचीत करने लगे। इसकी जानकारी विनय श्रीवास्तव और बैंक कर्मचारी सत्य प्रकाश को दी गई।
चेकिंग के बाद बरामद हुई रकम
सूचना मिलने के बाद गणना कक्ष में चेकिंग शुरू कर दी गई। पुलिस के अनुसार, चेकिंग शुरू होने के बाद चोरी की रकम को बाथरूम में छिपा दिया गया। तलाशी के दौरान वहां से सवा दो लाख रुपये बरामद हुए। बरामद धनराशि को विनय श्रीवास्तव ने एक बॉक्स में सुरक्षित रखवा दिया था।
चार्जशीट में दर्ज घटनाक्रम के मुताबिक, गणना कर्मियों की ओर से दी गई शुरुआती सूचना ने मामले की जांच को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वीडियो और मैसेज के जरिए सामने आई जानकारी के बाद गणना कक्ष में हुई गतिविधियों की जांच की गई और चोरी की रकम की बरामदगी हुई।











