रांची के नामकुम प्रखंड में बासी दूध से बने उत्पाद खाने से एक ही परिवार के सात लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। जांच में बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका जताई गई है और सभी मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ कर दिया गया।
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम प्रखंड के विशाखाटांगा गांव में बासी दूध से बने उत्पाद के सेवन के बाद एक ही परिवार के सात सदस्य फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। प्रभावित लोगों में तीन बच्चे भी शामिल हैं।
यह घटना 29 अप्रैल की बताई जा रही है, जब परिवार ने रिश्तेदार के यहां से लाया गया दूध से बना पारंपरिक खाद्य पदार्थ (खीरा-खीरसा/कोलोस्ट्रम आधारित उत्पाद) खाया था। इसके कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
घटना कैसे हुई: 2–3 दिन पुराना दूध उत्पाद बना कारण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस दूध उत्पाद का सेवन किया गया था, वह 2 से 3 दिन पहले तैयार किया गया था और उसे फ्रीज में रखकर सुरक्षित रखने की कोशिश की गई थी।
बाद में उसी उत्पाद को निकालकर खाया गया, जिसके बाद परिवार के सभी सदस्य बीमार पड़ गए।
जिला खाद्य सुरक्षा टीम की जांच में यह आशंका जताई गई है कि दूध उत्पाद में बैक्टीरियल संक्रमण विकसित हो गया था, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बना।
सात लोग हुए बीमार, तीन बच्चे भी शामिल
इस घटना में कुल सात लोग प्रभावित हुए, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं। सभी को तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
चिकित्सकों की देखरेख में इलाज के बाद सभी मरीजों की स्थिति अब स्थिर और सामान्य बताई जा रही है।
समय पर इलाज मिलने के कारण किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं हुई और सभी को स्वस्थ घोषित कर दिया गया।

जांच टीम की कार्रवाई: खाद्य सुरक्षा विभाग पहुंचा गांव
घटना की सूचना मिलते ही जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की छह सदस्यीय टीम गांव पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान यह पाया गया कि:
- दूध उत्पाद को 2–3 दिन पहले तैयार किया गया था
- उसे घर में फ्रीज में रखा गया था
- सेवन से पहले उसकी सही गुणवत्ता की जांच नहीं की गई थी
- उत्पाद का नमूना घटना के बाद उपलब्ध नहीं हो सका क्योंकि वह पहले ही खाया जा चुका था
हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में बैक्टीरियल संक्रमण को संभावित कारण माना गया है।
डॉक्टरों की चेतावनी: बासी और दूषित भोजन से बढ़ता खतरा
रांची के अभिहित अधिकारी और उप मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेश प्रसाद ने बताया कि गलत तरीके से रखे गए या बिना उबाले दूध से बने उत्पादों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन फूड पॉइजनिंग का प्रमुख कारण बन सकता है।
फूड पॉइजनिंग के सामान्य लक्षण:
- जी मिचलाना
- उल्टी
- पेट में दर्द या मरोड़
- दस्त
- बुखार
- सिरदर्द
- शरीर में कमजोरी
डॉक्टरों के अनुसार, ये लक्षण दूषित भोजन के सेवन के 1 से 24 घंटे के भीतर दिखाई दे सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह: दूध को हमेशा उबालकर करें उपयोग
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन हमेशा सावधानी के साथ करना चाहिए।
- खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार ने ग्रामीणों को निम्नलिखित सलाह दी:
- दूध को हमेशा अच्छी तरह उबालकर ही उपयोग करें
- बचे हुए भोजन को सही तापमान पर स्टोर करें
- फ्रीज में रखे खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक न रखें
- बर्तनों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
- बासी भोजन के सेवन से बचें
फूड सेफ्टी और ग्रामीण जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर जागरूकता की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों के संरक्षण में अक्सर वैज्ञानिक तरीके नहीं अपनाए जाते, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
फूड सेफ्टी विभाग ने भी कहा है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए लोगों को नियमित रूप से जागरूक किया जाएगा।
बैक्टीरियल संक्रमण कैसे फैलता है?
डॉक्टरों के अनुसार, दूध और डेयरी उत्पाद बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण होते हैं।
यदि इन्हें सही तापमान पर स्टोर नहीं किया जाए या लंबे समय तक रखा जाए, तो इनमें हानिकारक बैक्टीरिया जैसे E. coli, Salmonella आदि पनप सकते हैं।
ये बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करके पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं और फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।
बच्चों पर ज्यादा खतरा क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कमजोर होती है, इसलिए वे फूड पॉइजनिंग से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।
इस मामले में तीन बच्चे भी बीमार हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दूषित भोजन बच्चों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है।
इलाज और स्वास्थ्य स्थिति
सभी सात मरीजों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें तरल पदार्थ और हल्का भोजन लेने की सलाह दी।
इलाज के बाद सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें घर भेज दिया गया है।
प्रशासन की अपील: सावधानी ही बचाव है
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खाद्य पदार्थों के सेवन में सावधानी बरतें।
विशेष रूप से दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पादों को हमेशा सही तरीके से उबालकर और सुरक्षित तरीके से स्टोर करके ही उपयोग करें।










