RBI MPC Meeting 2026: क्या बढ़ेगी EMI या मिलेगा राहत का संकेत? आज से शुरू हुई अहम बैठक

RBI की Monetary Policy Committee (MPC) की 2026 बैठक आज से शुरू हो गई है। इस फैसले पर देशभर के लोन धारकों की नजर है कि क्या EMI बढ़ेगी या राहत का संकेत मिलेगा

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) आज से अपनी तीन दिवसीय बैठक शुरू कर रही है। Reserve Bank of India के गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है। इस बैठक पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है, क्योंकि यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ेगी, घटेगी या स्थिर रहेगी।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून 2026 को इस बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार रेपो रेट में किसी बदलाव की संभावना कम है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रास्फीति के संकेत नीति निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।

रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद कम

अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों के बीच आम राय यह है कि RBI इस बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रख सकता है। Moneycontrol के एक सर्वे के अनुसार, 14 में से 10 विशेषज्ञों ने भी यही अनुमान जताया है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव बढ़ता है, तो भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता।

पिछले वर्ष RBI ने फरवरी 2025 से मौद्रिक सहजता (monetary easing) की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके तहत कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी। इसके बाद फरवरी और अप्रैल 2026 की बैठकों में भी रेपो रेट को स्थिर रखा गया था।

EMI पर क्या होगा असर?

यदि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। होम लोन, कार लोन और अन्य व्यक्तिगत ऋणों की ब्याज दरों में कोई राहत नहीं मिलेगी और EMI पहले जैसी ही बनी रहेगी। बैंक आमतौर पर RBI से मिलने वाले सस्ते या महंगे कर्ज के आधार पर अपनी ब्याज दरों को तय करते हैं। जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंक अपनी लोन दरें भी बढ़ा देते हैं, जिससे EMI महंगी हो जाती है। इसके विपरीत, रेट में कटौती से EMI घटने की संभावना बनती है।

रेपो रेट और महंगाई के बीच सीधा संबंध होता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो RBI अक्सर मांग को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। इसका उद्देश्य बाजार में नकदी प्रवाह को कम करना और खर्च की गति को नियंत्रित करना होता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों को RBI से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है, जिसका असर ग्राहकों पर पड़ता है। बैंक लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे EMI बढ़ जाती है और लोग खर्च करने के बजाय बचत की ओर रुख करते हैं।

इसके अलावा, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें भी बढ़ा देते हैं, जिससे लोग निवेश को प्राथमिकता देने लगते हैं। इससे बाजार में मांग घटती है और धीरे-धीरे महंगाई पर नियंत्रण पाया जाता है।

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