भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो रही है। इस बैठक में रेपो रेट को लेकर अहम फैसला हो सकता है। बाजार में इस बार 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो रही है। इस बैठक पर आम लोगों से लेकर कारोबार और वित्तीय बाजार तक की नजर बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RBI इस बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा। आर्थिक विशेषज्ञों के बीच ऐसी संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है।
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाने का फैसला करता है, तो यह मौजूदा 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका होगा, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। MPC के फैसले का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम, लोन की ब्याज दरों और आम लोगों की EMI पर पड़ सकता है।
RBI के सामने महंगाई और कच्चे तेल की चुनौती
इस समय RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। अगर लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर परिवहन लागत पर पड़ता है और इसके बाद रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का जोखिम रहता है। ऐसे माहौल में RBI के लिए महंगाई को नियंत्रित रखना अहम चुनौती बन जाता है।
खुदरा महंगाई RBI के लक्ष्य से ऊपर

भारत में खुदरा महंगाई भी केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अगस्त 2026 में CPI Inflation बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। यह लगातार तीसरा महीना है, जब महंगाई दर RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही है। हालांकि, महंगाई अभी RBI के निर्धारित 2 से 6 फीसदी के टॉलरेंस बैंड के भीतर है। ऐसे में केंद्रीय बैंक को महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाकर फैसला लेना होगा।
रुपये और वैश्विक बाजार पर भी नजर
RBI के फैसले पर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों का भी असर पड़ सकता है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों और महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक लगातार अपनी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत के सामने रुपये को स्थिर रखने और विदेशी पूंजी के प्रवाह को बनाए रखने की चुनौती भी है।
इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि RBI इस बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि का विकल्प चुन सकता है। हालांकि अंतिम फैसला MPC के सदस्यों के आकलन और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
रेपो रेट बढ़ने से EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए फंडिंग की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, अगर बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI बढ़ सकती है। इससे पहले से लोन चुका रहे लोगों का मासिक खर्च बढ़ सकता है और नए कर्ज लेने वालों के लिए भी उधार महंगा हो सकता है।












