रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघिन आरबीटी-2504 ‘माही’ और आरबीटी-2510 लापता हो गई हैं। वन विभाग ने पांच टीमें और 100 कैमरा ट्रैप लगाकर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। दोनों बाघिनों का कई दिनों से कोई मूवमेंट नहीं मिला।
सवाई माधोपुर: राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में दो बाघिनों के लापता होने से वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। आरबीटी-2504 (माही) और आरबीटी-2510 पिछले कई दिनों से कैमरा ट्रैप और जंगल गश्त में नजर नहीं आई हैं, जिसके बाद विभाग ने व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पांच विशेष टीमें गठित की हैं, जो लगातार जंगल के अलग-अलग हिस्सों में पैदल गश्त कर रही हैं।
‘माही’ और मां के बीच टेरिटोरियल संघर्ष के बाद गायब हुई बाघिन
वन अधिकारियों के अनुसार बाघिन आरबीटी-2504, जिसे ‘माही’ के नाम से भी जाना जाता है, 3 मई के बाद से लापता है। इसी दिन उसका अपनी मां बाघिन टी-124 रिद्धि के साथ टेरिटोरियल संघर्ष हुआ था।
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि यह पहली बार नहीं था जब दोनों के बीच क्षेत्र को लेकर संघर्ष हुआ हो। इससे पहले भी कई बार टकराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 3 मई को हुए संघर्ष के बाद माही का मूवमेंट पूरी तरह से बंद हो गया।
माही को आखिरी बार 2 मई को देखा गया था, जब वह रणथंभौर के जोन नंबर 2, 3 और 4 के लेक क्षेत्र में विचरण कर रही थी। पिछले लगभग 17 दिनों से उसका कोई सुराग नहीं मिला है।
पहले भी घायल हो चुकी थी ‘माही’
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में भी माही और उसकी मां रिद्धि के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें दोनों घायल हो गई थीं। उस समय 28 दिसंबर को माही के कान पर घाव देखा गया था, जबकि रिद्धि लंगड़ाकर चलती पाई गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेरिटोरियल संघर्ष युवा बाघों के व्यवहार का हिस्सा होता है, जब वे अपनी अलग पहचान और क्षेत्र स्थापित करने की कोशिश करते हैं।
दूसरी बाघिन आरबीटी-2510 भी लंबे समय से लापता
वन विभाग की निगरानी से ओझल दूसरी बाघिन आरबीटी-2510 भी चिंता का विषय बनी हुई है। यह बाघिन टी-107 सुल्ताना की संतान है और उसका मूवमेंट झूमर बावड़ी, फतेह कैफे, आमाघाटी और फलोदी क्षेत्र में अधिक देखा जाता था।

जानकारी के अनुसार, यह बाघिन अक्सर बाघ 2407 के साथ देखी जाती थी। लगभग 28 दिन पहले इसे आखिरी बार झूमर बावड़ी क्षेत्र में देखा गया था, जिसके बाद से इसका भी कोई मूवमेंट ट्रेस नहीं हो सका है।
इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी और कैमरा ट्रैप की संख्या को और बढ़ा दिया है।
100 कैमरा ट्रैप और पांच टीमें कर रहीं सर्च ऑपरेशन
वन विभाग ने दोनों बाघिनों की तलाश के लिए लगभग 100 कैमरा ट्रैप लगाए हैं, जो जंगल के संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इसके अलावा पांच विशेष सर्च टीमें लगातार पैदल गश्त कर रही हैं।
इन टीमों का उद्देश्य बाघिनों के पगमार्क, मूवमेंट या किसी भी प्रकार के संकेतों का पता लगाना है। विभाग ड्रोन और तकनीकी निगरानी के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है ताकि सर्च ऑपरेशन को और प्रभावी बनाया जा सके।
वन विभाग की रणनीति और निगरानी व्यवस्था
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि विभाग पूरी सतर्कता के साथ इस मामले की निगरानी कर रहा है। जंगल के भीतर सभी संभावित क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया जा रहा है और हर संभावित दिशा में टीमों को तैनात किया गया है।
उन्होंने कहा कि कैमरा ट्रैप डेटा की नियमित जांच की जा रही है ताकि किसी भी हलचल को तुरंत ट्रैक किया जा सके।
वन विभाग का मानना है कि दोनों बाघिनें या तो गहरे जंगल क्षेत्रों में चली गई हैं या फिर अपने नए टेरिटरी क्षेत्र की ओर बढ़ी हो सकती हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार रणथंभौर जैसे घने और विस्तृत जंगलों में युवा बाघों का लंबे समय तक गायब होना कई बार सामान्य माना जाता है, लेकिन लगातार दो बाघिनों का एक साथ लापता होना असामान्य स्थिति है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह स्थिति प्राकृतिक कारणों, टेरिटोरियल संघर्ष या फिर अन्य बाघों के दबाव का परिणाम हो सकती है।
पर्यावरण और पर्यटन पर प्रभाव
रणथंभौर टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां बाघों की उपस्थिति पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य कारण है। ऐसे में दो बाघिनों के लापता होने की खबर से पर्यावरणीय और पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और सर्च ऑपरेशन पूरी गंभीरता से जारी है।
जल्द समाधान की उम्मीद
वन विभाग ने उम्मीद जताई है कि दोनों बाघिनों का जल्द पता लगा लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अब तक के संकेतों के आधार पर किसी तरह की अप्रिय घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
टीमें लगातार जंगल में सक्रिय हैं और हर संभावित क्षेत्र की गहन जांच की जा रही है।










