RSS का 100वां वर्ष: संगठनात्मक और राजनीतिक ढांचे में होगा बड़ा बदलाव

RSS का 100वां वर्ष: संगठनात्मक और राजनीतिक ढांचे में होगा बड़ा बदलाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100वें वर्ष में संगठनात्मक और रणनीतिक रूप से बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। संघ के नेतृत्व का मानना है कि संगठन को अब जमीनी स्तर से और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि यह हर गांव और मोहल्ले तक अधिक प्रभावी रूप से पहुंच सके। 

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के 100वें वर्ष में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी कर रहा है। हालांकि आरएसएस हमेशा से जमीन से जुड़ा संगठन रहा है, लेकिन अब जमीनी स्तर पर इसके जुड़ाव को और बढ़ाने के लिए नए संगठनात्मक ढांचे पर काम किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन को लोगों से और अधिक जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है, और आने वाले दिनों में संघ इसी दिशा में बदलाव लागू कर सकता है। 

इस परिवर्तन प्रक्रिया में संघ अपने राजनीतिक संगठन, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ तालमेल को भी नए ढांचे में ढालने की योजना बना रहा है, ताकि शीर्ष स्तर से समन्वय सीधे जमीनी स्तर तक पहुंच सके।

संगठनात्मक बदलाव का उद्देश्य

RSS हमेशा से जमीनी संगठन रहा है। लेकिन अब संघ प्रारंभिक इकाइयों को निर्णय लेने में अधिक स्वतंत्रता देने और संगठन को विकेंद्रीकृत करने की योजना बना रहा है। यह कदम संगठन को अधिक लचीला और समय पर प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि आंतरिक समिति ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अगले वर्ष होने वाली प्रतिनिधि सभा में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

वर्तमान में RSS 46 प्रांतों के माध्यम से कार्य करता है। नए ढांचे में प्रांतों को 90 संभागों में बदलने की योजना है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर और शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरी कम करना और निर्णय प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाना है। वर्तमान में संघ के 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जिन्हें घटाकर 9 किया जा सकता है। इसके अलावा प्रांत प्रचारकों की जगह प्रदेश प्रचारक का सिस्टम लागू करने की योजना है। 

उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में वर्तमान 6 प्रांतों को 9 संभागों में बदला जाएगा, जो शासकीय संभागों के अनुरूप होंगे। प्रत्येक संभाग में एक प्रचारक होगा, जो सीधे प्रदेश प्रचारक से जुड़े रहेंगे।

जमीनी संपर्क और विभागीय ढांचा

संघ के नीचे के स्तर, जैसे विभाग और जिला प्रचारक की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। लगभग सभी जिलों में संघ कार्यालय मौजूद हैं, जिससे गांवों और मोहल्लों तक संपर्क बनाए रखना आसान होगा। RSS प्रमुख मोहन भागवत लगातार अपने प्रचारकों को यही निर्देश देते रहे हैं कि वे राजनीतिक राजनीति में उलझे बिना सामाजिक बदलाव पर ध्यान दें। 

इसके तहत संघ का ध्यान सामुदायिक कार्य, पर्यावरण सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक मूल्यों पर रहेगा। प्रचारकों से अपेक्षा होगी कि वे कई भाषाओं को सीखें और संवाद कौशल को मजबूत करें। संघ के छह मूल विभाग—प्रचार, बौद्धिक, शारीरिक, व्यवस्था, संपर्क और सेवा—में कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्रों का विस्तार और उनका आधुनिकीकरण किया जाएगा, ताकि संपर्क और तालमेल में सुधार हो।

RSS आने वाले समय में BJP के साथ तालमेल की प्रक्रिया में भी बदलाव कर सकता है। अब केवल शीर्ष नेतृत्व स्तर पर समन्वय नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी और मध्य स्तर पर भी संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य दोनों संगठनों के रिश्तों को और स्थानीय और व्यावहारिक बनाना है।

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