रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया ने बड़ी बढ़त बनाई है। शुरुआती नतीजों में पार्टी को करीब 58% वोट मिले। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है।
मॉस्को: रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 95 फीसदी से अधिक मतों की गिनती के बाद यूनाइटेड रशिया को 57.83 फीसदी वोट मिले हैं और पार्टी ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें हासिल कर संवैधानिक बहुमत बरकरार रखा है। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला स्टेट ड्यूमा चुनाव है। मतदान ऐसे समय हुआ जब रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले भी हुए।
2021 के मुकाबले यूनाइटेड रशिया का प्रदर्शन
2021 के पिछले स्टेट ड्यूमा चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने पार्टी-लिस्ट वोट में करीब 49.8 फीसदी मत हासिल किए थे। इस बार शुरुआती अंतिम आंकड़ों में पार्टी का वोट शेयर 57 फीसदी से अधिक रहा। 2021 में पार्टी ने कुल 450 सीटों में से 324 सीटें जीती थीं।
मौजूदा चुनाव के परिणामों में यूनाइटेड रशिया के पास 355 सीटें पहुंचने का अर्थ है कि पार्टी के पास सदन में दो-तिहाई से अधिक सीटें हैं। इससे संवैधानिक बहुमत के स्तर पर उसकी स्थिति बनी रहती है। हालांकि, रूस की चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर विपक्षी समूहों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की ओर से अलग-अलग आपत्तियां और आलोचनाएं भी सामने आई हैं।
स्टेट ड्यूमा क्या है?
स्टेट ड्यूमा रूस की संघीय संसद का निचला सदन है। इसमें कुल 450 सदस्य होते हैं। रूस की मौजूदा चुनाव व्यवस्था में 225 सीटें पार्टी-लिस्ट प्रणाली के जरिए और अन्य 225 सीटें एकल-सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं।
इसे भारत की लोकसभा से मोटे तौर पर समझा जा सकता है, हालांकि दोनों देशों की संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं।
ड्यूमा में कानूनों पर चर्चा और मतदान होता है। संघीय बजट और सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधायी मामलों में भी सदन की भूमिका होती है। इसलिए राष्ट्रपति और सरकार के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन होना विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होता है।
पुतिन के लिए बहुमत क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रपति पुतिन के लिए यूनाइटेड रशिया का मजबूत संसदीय बहुमत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सरकार के विधायी प्रस्तावों को स्टेट ड्यूमा में समर्थन हासिल करना आसान रहता है।
किसी सरकार की नीतियों को कानून का रूप देने के लिए संसदीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। मजबूत बहुमत होने पर सत्तारूढ़ पक्ष को विपक्षी दलों के समर्थन पर कम निर्भर रहना पड़ता है।
मौजूदा परिणाम में यूनाइटेड रशिया का 355 सीटों तक पहुंचना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि पार्टी के पास अकेले ही सदन में संवैधानिक बहुमत है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि संसदीय बहुमत को सीधे राष्ट्रपति पद की संवैधानिक शक्तियों के बराबर नहीं माना जा सकता। रूस की राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति, सरकार और संसद की अलग-अलग संवैधानिक भूमिकाएं हैं।
पुतिन यूनाइटेड रशिया के सदस्य नहीं हैं
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। इसके बावजूद पार्टी लंबे समय से पुतिन के राजनीतिक नेतृत्व का समर्थन करती रही है।
पुतिन वर्ष 2008 से 2012 तक यूनाइटेड रशिया के चेयरमैन रहे थे। उस समय भी वे पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं थे। 2012 में उन्होंने चेयरमैन का पद छोड़ दिया और दिमित्री मेदवेदेव ने यह जिम्मेदारी संभाली।
इसलिए चुनावी कवरेज में यूनाइटेड रशिया को पुतिन समर्थक या पुतिन के साथ गठबंधन वाली प्रमुख सत्तारूढ़ पार्टी के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन पुतिन को पार्टी का मौजूदा सदस्य बताना सही नहीं होगा।
यूक्रेन युद्ध के बाद पहला संसदीय चुनाव
यह चुनाव फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर शुरू किए गए पूर्ण पैमाने के सैन्य अभियान के बाद पहला स्टेट ड्यूमा चुनाव है। चुनाव अभियान में यूक्रेन युद्ध और रूसी सैनिकों का मुद्दा भी प्रमुख रहा।
रूसी अधिकारियों और पुतिन ने चुनाव को देश की मौजूदा दिशा और सैनिकों के समर्थन से जोड़ा। वहीं, विपक्षी समूहों ने चुनावी प्रतिस्पर्धा की स्थितियों और सरकार विरोधी उम्मीदवारों पर प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए।
युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी चुनाव से बाहर
रूस की युद्ध-विरोधी रुख वाली याब्लोको पार्टी इस बार पार्टी के नाम पर चुनाव नहीं लड़ सकी। हालांकि, उसके कुछ नेताओं को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की अनुमति मिली थी।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, चुनाव में सरकार की आलोचना करने वाले कई नेताओं और उम्मीदवारों की भागीदारी सीमित रही। विपक्षी समूहों और निर्वासन में रह रहे आलोचकों ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। इन दावों को रूसी अधिकारियों के आधिकारिक रुख से अलग करके देखना जरूरी है।
मतदान प्रतिशत कितना रहा?
रूसी अधिकारियों के अनुसार मतदान समाप्त होने तक कुल मतदान करीब 56.66 फीसदी रहा। चुनाव तीन दिनों तक चला और अंतिम मतदान रविवार को समाप्त हुआ।
मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और मतदान प्रणाली को लेकर तकनीकी समस्याओं तथा साइबर हमलों की भी रिपोर्ट सामने आई। रूसी अधिकारियों ने चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणालियों और संचार नेटवर्क पर हमलों की सूचना दी, हालांकि उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया व्यापक रूप से जारी रही।
चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला
रूस में मतदान के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की सूचना मिली। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन के अनुसार, शनिवार से रविवार के बीच रूस ने 1,600 से अधिक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, जिनमें करीब 450 मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे।
हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा और एक ड्रोन के एक आवासीय इमारत से टकराने की भी सूचना दी गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक 21 मंजिला इमारत को नुकसान पहुंचने के बाद करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया।
शुरुआती रिपोर्टों में दो लोगों की मौत बताई गई थी, लेकिन बाद में मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि घायलों में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। इसके बाद कुल मृतक संख्या तीन बताई गई।
रूसी अधिकारियों ने हमले को चुनाव बाधित करने की कोशिश बताया। यह उनका आरोप है; हमले के उद्देश्य और उसके व्यापक प्रभाव को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे मौजूद हैं। यूक्रेन ने हमले के संबंध में रूस के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है, जबकि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बाद में रूस के खिलाफ लंबी दूरी के हमलों के प्रभाव का उल्लेख किया।
चुनाव और युद्ध का आपसी संदर्भ
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि मतदान सीधे यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में हुआ। एक तरफ क्रेमलिन ने चुनाव को देश और सैनिकों के समर्थन के साथ जोड़ा, दूसरी तरफ विपक्षी समूहों ने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की सीमाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
मॉस्को पर ड्रोन हमला भी मतदान के अंतिम दिन हुआ, जिससे चुनाव और युद्ध के बीच संबंध को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान और बढ़ गया। हालांकि, किसी हमले को चुनाव परिणाम का कारण मानना उचित नहीं होगा।
आगे क्या मायने रखता है?
यूनाइटेड रशिया की जीत और 450 सदस्यीय ड्यूमा में संवैधानिक बहुमत बरकरार रहने से रूस की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में संसद पर सत्तारूढ़ पक्ष का मजबूत नियंत्रण जारी रहेगा।
इस बहुमत से सरकार के लिए कानूनों, बजट और अन्य विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाना आसान रहेगा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों की सीमित भागीदारी और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल आने वाले समय में रूस की घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बने रह सकते हैं।
रूस के चुनाव के अंतिम आधिकारिक आंकड़े आने के बाद सीटों का अंतिम वितरण और अन्य दलों का प्रदर्शन अधिक स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों में यूनाइटेड रशिया ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और पुतिन के नेतृत्व वाली व्यवस्था के लिए संसद में मजबूत समर्थन कायम रखा है।










