भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में ICICI प्रूडेंशियल AMC के एस. नरेन की निवेश संबंधी सलाह धैर्य और लंबी अवधि की रणनीति के महत्व पर जोर देती है।
Contrarian Investing: शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना जरूरी है। ICICI प्रूडेंशियल AMC के ED और CIO एस. नरेन की निवेश संबंधी सलाह का प्रमुख संदेश है कि बाजार की अस्थायी गिरावट के कारण लंबी अवधि की रणनीति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबाव के बावजूद निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर फैसले लेने चाहिए।
भारतीय शेयर बाजार में क्यों बढ़ रही है उठापटक?
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। बाजार में कभी तेजी दिखाई देती है, तो अगले कुछ कारोबारी सत्रों में गिरावट देखने को मिलती है। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ी है। बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विभिन्न देशों के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेश में वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा जाने से उभरते बाजारों के लिए चुनौतियां बढ़ी हैं।
दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से चार लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। वहीं, हाल के नौ दिनों में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की बिकवाली का उल्लेख किया गया है। इतनी बड़ी निकासी से बाजार के प्रमुख इंडेक्स और कई शेयरों पर दबाव पड़ सकता है।
Contrarian Investing में धैर्य की भूमिका
Contrarian Investing ऐसी निवेश रणनीति है, जिसमें निवेशक बाजार में प्रचलित धारणा से अलग सोचकर अवसर तलाशते हैं। जब बाजार में डर और निराशा का माहौल होता है, तब कुछ निवेशक कंपनियों की वित्तीय स्थिति, वास्तविक मूल्य और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का विश्लेषण करके निवेश के अवसर खोजते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर गिरावट के दौरान शेयर खरीदना फायदेमंद होगा। किसी भी निवेश से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के वैल्यूएशन को समझना जरूरी है।
बाजार में गिरावट देखकर घबराहट में निवेश बेच देने से निवेशक भविष्य में होने वाली संभावित रिकवरी का फायदा उठाने से चूक सकते हैं। इसलिए निवेश के फैसले केवल रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर लेने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर लेने चाहिए।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है लंबी अवधि का नजरिया?
अनिश्चित बाजार में निवेशकों को अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए किया गया निवेश और निकट भविष्य में इस्तेमाल होने वाली रकम अलग-अलग तरीके से मैनेज करना बेहतर होता है।
भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण आधार हो सकती है, लेकिन इससे शेयर बाजार में तेजी की गारंटी नहीं मिलती। वैश्विक परिस्थितियों, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेशकों की धारणा के कारण बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए और केवल बाजार में गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। विविधीकरण बनाए रखना, जरूरत के लिए पर्याप्त नकदी रखना और निवेश को वित्तीय लक्ष्यों से जोड़ना उपयोगी हो सकता है।
आखिरकार, शेयर बाजार में सफलता के लिए केवल सही समय पर निवेश करना ही नहीं, बल्कि जोखिम को समझना और अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। निवेशकों को किसी भी रणनीति को अपनाने से पहले अपनी जरूरतों, निवेश की अवधि और संभावित नुकसान का आकलन करना चाहिए।











