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SCO शिखर सम्मेलन! मोदी-पुतिन-चिनफिंग की मुलाकात से भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद

SCO शिखर सम्मेलन! मोदी-पुतिन-चिनफिंग की मुलाकात से भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद

चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन शुरू। पीएम मोदी, पुतिन और चिनफिंग की अहम मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें। भारत-चीन रिश्तों में सुधार और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की संभावना।

SCO Summit: चीन के तियानजिन शहर में आज से दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का वार्षिक शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। इस सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इस मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ मौजूद रहेंगे। बदलते वैश्विक हालात, खासकर अमेरिका की टैरिफ नीतियों और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

सात साल बाद पीएम मोदी की चीन यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल से अधिक के अंतराल के बाद चीन पहुंचे हैं। पिछली बार वे जून 2018 में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने चीन गए थे। इस बार उनकी यात्रा को कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी के कारण भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव आया है। वहीं भारत-चीन के रिश्ते गलवन घाटी की घटना के बाद से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी की चीन यात्रा से दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद की जा रही है।

31 अगस्त और 1 सितंबर को चलेगा सम्मेलन

SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी रणनीति, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस मंच पर भारत, चीन और रूस के साथ-साथ मध्य एशिया के कई देश भी हिस्सा ले रहे हैं।

भारत-चीन रिश्तों में नई उम्मीद

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ सालों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। अक्टूबर 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारत आए थे। इसके बाद जून 2020 में गलवन घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प ने रिश्तों में तनाव ला दिया था। हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग ई के भारत दौरे और अब पीएम मोदी की इस चीन यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी और वैश्विक असर

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए अमेरिका ने भारत और चीन दोनों पर टैरिफ लगाया था। रूस पर भी कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इस वजह से भारत, चीन और रूस के बीच आपसी सहयोग और व्यापार बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। तियानजिन में हो रही यह बैठक इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

मोदी-पुतिन बैठक पर सबकी नजर

तियानजिन पहुंचने के कुछ समय बाद ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात की। जेलेंस्की ने युद्धविराम की अपील की और भारत से शांति बहाली के लिए मदद मांगी। पीएम मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उम्मीद की जा रही है कि पुतिन के साथ उनकी होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा होगी।

चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता

रविवार को प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। यह बैठक खास इसलिए है क्योंकि दोनों देश अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी से प्रभावित हैं और वैश्विक व्यापार में उत्पन्न तनाव के बीच आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं।

भारत में चीनी राजदूत का बयान

भारत में चीनी राजदूत जू ने प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत-चीन रिश्तों में नई ऊर्जा लाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का चीन में स्वागत है और इस सम्मेलन से दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना है।

सम्मेलन के अहम मुद्दे

इस सम्मेलन में आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने की रणनीति, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के प्रयासों पर भी सभी देशों के नेता विचार-विमर्श करेंगे।

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