सेबी और गूगल ने फिनफ्लूएंसर्स पर नियंत्रण के लिए साझेदारी की है। AI टूल्स से भ्रामक कंटेंट पर नजर रखी जाएगी और वेरिफाइड ऐप लेबलिंग से निवेशकों को नकली ऐप्स से बचाने की कोशिश की जाएगी।
Business News: सेबी (Securities and Exchange Board of India) ने वित्तीय बाजार में धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन करने वाले फिनफ्लूएंसर्स पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि नियामक ने बड़ी तकनीकी कंपनियों, विशेष रूप से गूगल, से आग्रह किया है कि वे अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और एनफोर्समेंट उपायों को और मजबूत करें। इसका उद्देश्य उन वित्तीय प्रभावशाली व्यक्तियों या फिनफ्लूएंसर्स पर नजर रखना है, जो निवेशकों को भ्रमित कर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
चेयरमैन पांडेय ने कहा कि तकनीकी कंपनियों को आपस में और तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि धोखाधड़ी करने वाले लोग पकड़ में आएं और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक कंटेंट वाले लाखों लिंक पहले ही हटा दिए गए हैं। गूगल को भी इस दिशा में अपने AI आधारित उपायों को सक्रिय करने के लिए कहा गया है, ताकि वे ऐसे फिनफ्लूएंसर्स की पहचान कर सकें जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
AI और तकनीकी उपायों से निवेशकों की सुरक्षा
सेबी का उद्देश्य है कि निवेशकों को ऐसे साधनों से सुरक्षित रखा जाए, जो उन्हें नकली और धोखाधड़ी वाले ऐप्स और प्लेटफॉर्म से बचा सकें। पांडेय ने बताया कि नियामक और तकनीकी कंपनियों को मिलकर ऐसे उपकरण विकसित करने होंगे जो साइबर स्पेस में गलत गतिविधियों को रोक सकें। इसके तहत ऐसे लोग या प्लेटफॉर्म जो निवेशकों को भ्रमित कर रहे हैं, उन्हें प्रभावी तरीके से निशाना बनाया जाएगा और बाहर किया जाएगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि निवेशकों को सही जानकारी और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मिले, ताकि वे बिना धोखाधड़ी के अपने निवेश कर सकें। इसके लिए गूगल जैसी तकनीकी कंपनियों की भूमिका अहम है क्योंकि उनका डेटा और AI टूल्स धोखाधड़ी की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
वेरिफाइड ऐप लेबलिंग से नकली ऐप्स की पहचान
सेबी और गूगल ने मिलकर ‘वेरिफाइड ऐप लेबलिंग’ की शुरुआत की है। यह कदम निवेशकों को नकली और धोखाधड़ी वाले ऐप्स से बचाने के लिए उठाया गया है। अब गूगल प्ले स्टोर पर सेबी द्वारा पंजीकृत इंटरमीडियरीज जैसे कि स्टॉक ब्रोकर्स के ऐप्स पर एक वेरिफिकेशन टिक मार्क होगा। इससे निवेशकों को असली और भरोसेमंद ऐप्स पहचानने में आसानी होगी।
अभी तक 600 से अधिक ऐप्स को वेरिफाई किया जा चुका है। यह सुविधा जल्द ही अन्य पंजीकृत इंटरमीडियरीज के लिए भी उपलब्ध होगी। पांडेय ने कहा कि यह पहल निवेशकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश के लिए मार्गदर्शन करेगी।
सोशल मीडिया पर निगरानी और नियमों का पालन
सेबी का ध्यान सिर्फ ऐप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिनफ्लूएंसर्स की गतिविधियों पर भी रहेगा। पांडेय ने कहा कि नियामक लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी कर रहा है जो निवेशकों को भ्रमित करता है या नियमों का उल्लंघन करता है। इसके लिए गूगल जैसे तकनीकी दिग्गजों के AI टूल्स बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।
चेयरमैन ने यह स्पष्ट किया कि सेबी अपने कानूनों और नियमों के अनुसार ऐसे उपाय करने में जुटा है जो धोखाधड़ी करने वालों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बाहर निकाल सकें। इस कदम से निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
निवेशकों के लिए लाभ
इस नई पहल से निवेशकों को दो बड़े लाभ होंगे। पहला, वे असली और पंजीकृत ऐप्स को नकली ऐप्स से अलग पहचान पाएंगे। दूसरा, उन्हें सोशल मीडिया पर भ्रामक और धोखाधड़ी वाले फिनफ्लूएंसर्स से सतर्क रहने में मदद मिलेगी। पांडेय ने निवेशकों से भी आग्रह किया कि वे हमेशा केवल पंजीकृत और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध ऐप या कंटेंट से दूर रहें।
सेबी और गूगल की यह साझेदारी निवेशकों के लिए डिजिटल निवेश को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि निवेशक नकली ऐप्स या गलत सूचना के कारण किसी भी प्रकार के नुकसान से बच सकें।









