सोशल मीडिया के जरिए फर्जी निवेश सलाह और ठगी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए SEBI ने निगरानी और सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करना शुरू कर दिया है। नियामक गूगल और मेटा के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे निवेश से जुड़े विज्ञापन देने वाले व्यक्ति या संस्था की पहचान और उसका SEBI रजिस्ट्रेशन आसानी से सत्यापित किया जा सके।
SEBI Financial Influencers: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश संबंधी सलाह देने वाले वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स पर बाजार नियामक SEBI की निगरानी और सख्त होने जा रही है। निवेशकों को भ्रामक दावों, फर्जी निवेश योजनाओं और अवास्तविक रिटर्न के वादों से बचाने के लिए SEBI अब Google और Meta जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ सत्यापन व्यवस्था मजबूत करने पर काम कर रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेश या वित्तीय उत्पादों से जुड़े विज्ञापन चलाने वाले व्यक्ति अथवा संस्था की वास्तविक पहचान और नियामकीय स्थिति की पुष्टि की जा सके। Meta के साथ ऐसी सत्यापन व्यवस्था लागू हो चुकी है, जबकि Google के साथ इसे लागू करने को लेकर बातचीत जारी है।
Google के साथ सत्यापन व्यवस्था पर चर्चा
SEBI की नई व्यवस्था सामान्य वित्तीय विज्ञापन नीतियों से अलग होगी। मौजूदा व्यवस्था में विज्ञापनदाता को संबंधित वित्तीय नियामक से मिले लाइसेंस, पंजीकरण या छूट का प्रमाण प्रस्तुत करना पड़ सकता है। SEBI जिस तंत्र पर काम कर रहा है, उसमें विज्ञापनदाता की जानकारी को सीधे नियामक के रिकॉर्ड से मिलाने की व्यवस्था होगी। इसके लिए SEBI के पास पहले से उपलब्ध मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसका मकसद केवल विज्ञापनदाता के स्वयं किए गए दावे पर भरोसा करने के बजाय उसकी नियामकीय स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि करना है। इससे ऐसे लोगों या संस्थाओं के लिए निवेश सलाह अथवा वित्तीय उत्पादों के प्रचार के नाम पर डिजिटल विज्ञापन चलाना मुश्किल हो सकता है, जो नियामक के साथ पंजीकृत नहीं हैं।
Meta के बाद Google पर नजर
SEBI ने निवेश और प्रतिभूति बाजार से जुड़े विज्ञापनों के सत्यापन को मजबूत करने की दिशा में अप्रैल 2025 में कदम उठाया था। इसके बाद Meta ने भारत में प्रतिभूति और निवेश से जुड़े विज्ञापन देने वालों के लिए SEBI सत्यापन की व्यवस्था लागू की। अब इसी तरह की प्रक्रिया Google के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागू करने को लेकर बातचीत चल रही है। इसका असर Google के विभिन्न डिजिटल विज्ञापन माध्यमों के साथ-साथ वित्तीय सेवाओं से जुड़े कंटेंट और प्रचार पर भी पड़ सकता है।
नियामक की कोशिश है कि निवेशकों तक पहुंचने वाले वित्तीय प्रचार की विश्वसनीयता बढ़ाई जाए और अपंजीकृत संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले भ्रामक प्रचार को शुरुआती स्तर पर रोका जा सके।

Financial Influencers के लिए ‘Verified Tick’ पर विचार
सोशल मीडिया पर वित्तीय सलाह देने वाले इन्फ्लुएंसर्स की बढ़ती संख्या के बीच Verified Tick या आधिकारिक सत्यापन चिह्न की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम निवेशकों को यह पहचानने में मदद करना है कि कोई वित्तीय इन्फ्लुएंसर SEBI के नियामकीय दायरे में पंजीकृत है या नहीं। यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश संबंधी सलाह देखने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए अधिकृत और अनधिकृत स्रोतों के बीच अंतर करना आसान हो सकता है। हालांकि, सत्यापित चिह्न को लेकर अंतिम व्यवस्था और उसके संचालन से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट होना बाकी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की 259वीं रिपोर्ट में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ ऐसा तंत्र विकसित करने की सिफारिश की गई है, जिससे निवेश संबंधी सलाह और प्रचार केवल पंजीकृत एवं अधिकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित किया जा सके। समिति ने सत्यापन चिह्न की संभावना पर भी विचार करने की बात कही है।
AI से भ्रामक वित्तीय कंटेंट की निगरानी
SEBI डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली भ्रामक वित्तीय सामग्री की पहचान के लिए Artificial Intelligence (AI) आधारित निगरानी तंत्र को भी मजबूत करने पर जोर दे रहा है। Google, Meta और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ सहयोग के जरिए संदिग्ध वित्तीय कंटेंट, फर्जी निवेश योजनाओं और अपंजीकृत सलाह देने वाले अकाउंट्स की पहचान तेजी से करने की कोशिश की जा रही है। जरूरत पड़ने पर ऐसे कंटेंट को हटाने या उसकी पहुंच सीमित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।










