शेयर बाजार में ट्रेडिंग को आसान कमाई का जरिया समझने वाले रिटेल निवेशकों के लिए SEBI की नई रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार करने वाले रिटेल निवेशकों को कुल मिलाकर करीब 91,685 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ।
SEBI Report: शेयर बाजार में इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को तेजी से कमाई का जरिया मानने वाले निवेशकों के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई रिपोर्ट महत्वपूर्ण संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार करने वाले रिटेल ट्रेडर्स की संख्या में गिरावट आई, लेकिन नुकसान की तस्वीर अब भी चिंताजनक बनी हुई है। औसतन एक रिटेल ट्रेडर को करीब 1.17 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
SEBI के अध्ययन के मुताबिक, FY26 में रिटेल ट्रेडर्स को इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार में कुल मिलाकर करीब 91,685 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ। खास बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में ट्रेडर्स की संख्या कम होने के बावजूद प्रति ट्रेडर औसत नुकसान बढ़ गया।
87.5 लाख रह गई एक्टिव रिटेल ट्रेडर्स की संख्या
रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में सक्रिय व्यक्तिगत ट्रेडर्स की संख्या करीब 18 प्रतिशत घटकर 87.5 लाख रह गई। FY25 में यह आंकड़ा लगभग 1.06 करोड़ था। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि FY16 के बाद पहली बार रिटेल ट्रेडर्स की संख्या में साल-दर-साल कमी दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि लगातार नुकसान और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई छोटे निवेशक डेरिवेटिव्स कारोबार से दूरी बनाने लगे हैं।
नए ट्रेडर्स की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई। FY26 में करीब 20.8 लाख नए ट्रेडर्स डेरिवेटिव्स मार्केट में आए, जबकि FY25 में यह संख्या लगभग 34.3 लाख थी।
प्रति ट्रेडर नुकसान बढ़कर ₹1.17 लाख

रिटेल भागीदारी घटने के बावजूद ट्रेडिंग से होने वाला औसत नुकसान कम नहीं हुआ। FY26 में एक ट्रेडर को औसतन करीब ₹1.17 लाख का नुकसान हुआ। FY25 में यह आंकड़ा लगभग ₹1.13 लाख था। इस तरह औसत नुकसान में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि नुकसान झेलने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी थोड़ा कम हुआ है।
FY25 में करीब 90.9 प्रतिशत ट्रेडर्स नुकसान में रहे थे, जबकि FY26 में यह अनुपात घटकर 87.7 प्रतिशत रह गया। फिर भी आंकड़े बताते हैं कि डेरिवेटिव्स बाजार में नुकसान उठाने वाले छोटे ट्रेडर्स की संख्या बहुत बड़ी है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग बनी सबसे बड़ी वजह
SEBI की रिपोर्ट में ऑप्शंस ट्रेडिंग को रिटेल ट्रेडर्स के नुकसान का सबसे बड़ा कारण बताया गया है। FY25 और FY26 के दौरान करीब 99.3 प्रतिशत रिटेल ट्रेडर्स ने किसी न किसी रूप में ऑप्शंस में कारोबार किया। वहीं, लगभग 93 प्रतिशत ट्रेडर्स ऐसे थे जिन्होंने केवल ऑप्शंस में ट्रेडिंग की। इसका सीधा असर कुल नुकसान पर भी दिखाई दिया। FY26 में रिटेल ट्रेडर्स के कुल नुकसान का लगभग 92 प्रतिशत हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया।
ऑप्शंस में कम पूंजी के साथ बड़ी पोजीशन लेने का अवसर मिलता है, लेकिन इसमें जोखिम भी काफी अधिक होता है। बाजार की दिशा उम्मीद के विपरीत जाने पर कम समय में बड़ा नुकसान हो सकता है।
46 लाख ट्रेडर्स ने छोड़ा डेरिवेटिव्स बाजार
SEBI के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। FY26 में करीब 46 लाख ऐसे ट्रेडर्स थे, जिन्होंने FY25 में डेरिवेटिव्स में कारोबार किया था, लेकिन अगले वित्त वर्ष में उन्होंने ट्रेडिंग नहीं की। FY25 में बाजार से बाहर होने वाले ऐसे ट्रेडर्स की संख्या करीब 26 लाख थी। यानी एक साल में यह संख्या लगभग 76 प्रतिशत बढ़ गई। यह बदलाव संकेत देता है कि बड़ी संख्या में छोटे ट्रेडर्स लगातार नुकसान या जोखिम के बाद डेरिवेटिव्स कारोबार से बाहर हो रहे हैं।











