शंकराचार्य की ‘चतुरंगिणी’ सेना कैसी होगी?: योद्धाओं की पीली ड्रेस, हाथ में तलवार-भाले; सेनापति खुद अविमुक्तेश्वरानंद

अविमुक्तेश्वरानंद की प्रस्तावित ‘चतुरंगिणी’ सेना चर्चा में है। इसमें योद्धा पीले वस्त्र पहनेंगे और हाथों में तलवार-भाले जैसे पारंपरिक अस्त्र होंगे।
शंकराचार्य की ‘चतुरंगिणी’ सेना कैसी होगी?: योद्धाओं की पीली ड्रेस, हाथ में तलवार-भाले; सेनापति खुद अविमुक्तेश्वरानंद
Photo Credit / Attribution: google

उत्तर प्रदेश के Varanasi में शंकराचार्य की प्रस्तावित ‘चतुरंगिणी सेना’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस सेना का नेतृत्व Swami Avimukteshwaranand Saraswati खुद करेंगे। बताया जा रहा है कि इस विशेष धार्मिक सेना का उद्देश्य धर्म और सनातन परंपराओं की रक्षा करना होगा।

जानकारी के मुताबिक इस सेना के योद्धाओं की पहचान उनकी खास पोशाक से होगी। सभी सदस्य पीले रंग की ड्रेस पहनेंगे, जो सनातन परंपरा में त्याग, तपस्या और धर्म का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही उनके हाथों में तलवार और भाले जैसे पारंपरिक अस्त्र भी होंगे।

चतुरंगिणी सेना का नाम प्राचीन भारतीय सैन्य परंपरा से लिया गया है। पुराने समय में चतुरंगिणी सेना में चार प्रकार की सैन्य शक्तियां शामिल होती थीं—पैदल सैनिक, घुड़सवार, रथ और हाथी। हालांकि वर्तमान में प्रस्तावित यह सेना धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्य से बनाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि सेना में शामिल होने वाले लोगों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें अनुशासन, धार्मिक ज्ञान और परंपराओं की जानकारी पर जोर रहेगा। इसके अलावा धार्मिक आयोजनों और यात्राओं में भी इस सेना की भूमिका रह सकती है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि सनातन धर्म की परंपराओं की रक्षा और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस सेना में शामिल होने के लिए युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

इस घोषणा के बाद वाराणसी और आसपास के इलाकों में यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है। कई लोग इसे सनातन संस्कृति के संरक्षण की पहल बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अलग नजरिए से भी देख रहे हैं। फिलहाल चतुरंगिणी सेना के गठन और इसकी रूपरेखा को लेकर आगे की तैयारियां जारी हैं।

 
 

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