शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना में भू-अर्जन बना अड़ंगा, 160 एकड़ में 98 एकड़ जमीन ही अधिग्रहित

शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना में 160 एकड़ में 98 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है। 579 रैयतों का भुगतान लंबित होने से परियोजना की रफ्तार धीमी है।

शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना में भू-अर्जन और मुआवजे का पेच बना हुआ है। कुल 160 एकड़ में 98 एकड़ भूमि का अधिग्रहण हुआ है, जबकि कई रैयतों का भुगतान लंबित है। सांसद लवली आनंद ने मामला लोकसभा में उठाया।

शिवहर: शिवहर-सीतामढ़ी विशेष रेलमार्ग परियोजना की रफ्तार भू-अर्जन और मुआवजे की प्रक्रिया के कारण धीमी पड़ गई है। परियोजना के लिए 160 एकड़ भूमि के अधिग्रहण में अब तक 98 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है। कई रैयतों को मुआवजे का भुगतान नहीं हो सका है। सांसद लवली आनंद ने 12 अगस्त को लोकसभा में परियोजना की प्रगति का मुद्दा उठाया।

भू-अर्जन की धीमी रफ्तार बनी बड़ी बाधा

शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग परियोजना को मंजूरी मिले तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। रेलवे मंत्री की ओर से लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार परियोजना के लिए कुल 160 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें अब तक 98 एकड़ भूमि का अधिग्रहण हो चुका है।

परियोजना के तहत बागमती नदी पर 600 मीटर से अधिक लंबे पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है। डुब्बाघाट में 12 स्पैन वाले करीब 610 मीटर लंबे पुल का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन बाढ़ के कारण काम रोकना पड़ा। यहां पुल निर्माण का काम गुवाहाटी की दुर्गा कृष्णा स्टोर नामक एजेंसी कर रही थी।

579 रैयतों का भुगतान अब भी लंबित

सामाजिक कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा की ओर से RTI के जरिए मांगी गई जानकारी के जवाब में जिला लोक सूचना पदाधिकारी सह जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने 13 अगस्त को भुगतान से जुड़ा विवरण दिया।

इसके अनुसार अब तक 215 पंचाटियों का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 579 पंचाटियों का भुगतान लंबित बताया गया है। परियोजना से जुड़े विस्तृत आंकड़ों के अनुसार अब तक 338 खेसरा के रैयतों को भुगतान किया गया है।

शिवहर जिले में 1,015 खेसरा और बिहार सरकार की 22 खेसरा जमीन समेत कुल 1,037 खेसरा का भू-अर्जन किया जाना है। इनमें 338 खेसरा के रैयतों का भुगतान हो चुका है, जबकि 677 खेसरा के रैयतों का भुगतान लंबित है।

अब तक मुआवजे के मद में 99 करोड़ 14 लाख 79 हजार 835 रुपये वितरित किए जा चुके हैं। कुछ मामलों में भूमि के बंटवारे, टाइटल सूट और भुगतान पर रोक के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

28 किलोमीटर लंबी रेललाइन में कई बड़े निर्माण

शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना का इतिहास भी लंबा रहा है। वर्ष 2007 में मोतिहारी-शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना को मंजूरी मिली थी, लेकिन काम सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा ने पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

मार्च 2023 में तत्कालीन सांसद रमा देवी ने 28 किलोमीटर लंबी विशेष रेल परियोजना को मंजूरी दिलाने और 657 करोड़ रुपये आवंटित कराने की जानकारी दी थी। इसके बाद परियोजना का शिलान्यास भी किया गया।

प्रस्तावित रेलखंड में 13 बड़े पुल, 62 पुलिया और छह रोड ओवरब्रिज बनाए जाने हैं। परियोजना के लिए कुल 184.61617 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी बताई गई है।

मुआवजे को लेकर कुछ रैयतों की आपत्ति

कुछ रैयतों ने जमीन की प्रकृति को लेकर सवाल उठाते हुए मुआवजा लेने से इनकार किया है। इससे जुड़े मामले रेलवे प्राधिकार के समक्ष लंबित हैं। वहीं कुछ जमीनों से जुड़े मामलों में बंटवारा और टाइटल विवाद के कारण भी भुगतान अटका हुआ है।

जिला प्रशासन की ओर से इन मामलों के समाधान के लिए प्रयास किए जाने की बात कही गई है। सांसद लवली आनंद ने भी परियोजना की स्थिति का मुद्दा लोकसभा में उठाया है।

सामाजिक कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा के अनुसार रेलवे की ओर से RTI के जवाब में जनवरी 2027 तक परियोजना पूरी करने की बात कही गई थी। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए भूमि अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान और निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण तय समयसीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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