भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को सेंसेक्स 1,710 अंक गिरकर 78,529 और निफ्टी 50 करीब 477 अंक टूटकर 24,389 पर आ गया। मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और FII बिकवाली ने निवेशकों में डर पैदा किया।
Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी भूचाल आया। BSE सेंसेक्स 1,710 अंक गिरकर 78,529 पर पहुंच गया, जो पिछले साल 17 अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं निफ्टी 50 करीब 477 अंक टूटकर 24,389 पर कारोबार कर रहा था और सात महीने में पहली बार 24,400 के नीचे आ गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की पूंजी धड़ाम हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार में डर का माहौल पैदा किया है। सुबह कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 2 प्रतिशत तक टूट गए। इससे साफ दिखा कि निवेशक अस्थिर वैश्विक हालात के बीच अपने जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे थे।
मिडिल ईस्ट तनाव बना मुख्य वजह
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। जवाबी हमलों और तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका से वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ी। इस चिंता का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मार्केट में भारी बिकवाली देखी गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ता है, तो बाजार में और गिरावट आ सकती है। निवेशकों को इस समय सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है और बड़े निवेश निर्णय सोच-समझ कर लेने चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए दुनिया के 20 प्रतिशत से अधिक तेल का परिवहन होता है। इस रूट पर तनाव और खतरों की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी लगभग 85 प्रतिशत तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से घरेलू महंगाई बढ़ सकती है और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव पड़ सकता है।
तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कॉरपोरेट मुनाफे और बाजार की स्थिरता पर असर पड़ेगा।
रुपया कमजोर, FII बिकवाली बढ़ी
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 92.05 तक फिसल गया। यह नए रिकॉर्ड निचले स्तर को दर्शाता है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार की धारणा और कमजोर हुई है। वहीं, घरेलू निवेशक (DII) खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन वह भारी गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं दिखे।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपया निवेशकों के लिए चेतावनी है। इस समय निवेशकों को छोटे और स्थिर निवेश विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए और मार्केट के उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
BSE और NSE के आंकड़े
4 मार्च की सुबह BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 449 लाख करोड़ रुपये तक गिर गया। सेंसेक्स और निफ्टी में व्यापक गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स में शामिल अधिकांश बड़े शेयर लाल निशान में थे। निफ्टी 50 के 50 में से अधिकांश स्टॉक्स दबाव में थे, जिससे संकेत मिला कि व्यापक बिकवाली का माहौल बना हुआ है।












