शिवसेना का BJP पर तीखा हमला: केजरीवाल और सिसोदिया की बरी को बताया मोदी-शाह की राजनीतिक बदले पर करारा तमाचा

शिवसेना का BJP पर तीखा हमला: केजरीवाल और सिसोदिया की बरी को बताया मोदी-शाह की राजनीतिक बदले पर करारा तमाचा

Rouse Avenue Court ने दिल्ली में आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत कुल 23 लोगों को बरी कर दिया है।

महाराष्ट्र: शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी CM मनीष सिसोदिया की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बरी होने के बाद केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सामना में लिखे लेख में कहा गया कि कोर्ट का यह आदेश मोदी-शाह की राजनीतिक बदले की भावना पर करारा तमाचा है और केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी कठघरे में खड़ा करता है।

दिल्ली में आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को बरी कर दिया। सामना ने इस फैसले को केंद्र सरकार की राजनीतिक चालों पर चोट बताते हुए लिखा कि अदालत ने साफ कर दिया कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं थी और कोई आपराधिक साजिश नहीं हुई।

भाजपा सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना

सामना ने आरोप लगाया कि भाजपा ने दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर झूठे आरोप लगाए क्योंकि दिल्ली में जनता द्वारा चुनी गई सरकार उनकी नहीं थी। लेख में कहा गया कि मुख्यमंत्री केजरीवाल और डिप्टी CM सिसोदिया भाजपा के खिलाफ मुखर थे, जिससे केंद्र सरकार द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई करवाई गई।

लेख में यह भी कहा गया कि केजरीवाल के घर पर छापेमारी और गिरफ्तारियां पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थीं। सामना ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को केजरीवाल और सिसोदिया से माफी मांगनी चाहिए, वहीं सीबीआई के नेतृत्व में झूठी कार्रवाई करने वालों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

सामना ने लिखा, भारत की जांच एजेंसियां भाजपा सरकार के कुत्ते हैं। पहले ये भौंकते हैं और फिर बदन पर कूदकर काटते हैं। यह सब राजनीतिक आकाओं के आदेश पर हुआ।

झूठे मामलों की लंबी सूची

सामना ने पिछले दस सालों में विपक्ष को निशाना बनाने वाले कई झूठे मामलों का जिक्र किया। महाराष्ट्र में छगन भुजबल, अनिल देशमुख, नवाब मलिक और संजय राऊत जैसे नेताओं को गिरफ्तार किया गया। छगन भुजबल को बाद में बरी कर दिया गया, लेकिन उन्हें ढाई साल तक जेल में रखा गया। वहीं, अजित पवार और हसन मुश्रीफ को ईडी का डर दिखाकर पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया गया।

लेख में कहा गया कि ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों ने अदालतों की अनदेखी का फायदा उठाया और सच्चाई को कुचल दिया। अदालत समय पर हस्तक्षेप करतीं तो भाजपा के अत्याचार इतने व्यापक रूप से फैल नहीं पाते।

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