श्रीलंका में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु पल्लेगामा हेमारथाना थेरो को नाबालिग लड़की से कथित रेप और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पीड़िता की मां को भी हिरासत में लिया है। मामले की जांच जारी है।
कोलंबो: श्रीलंका में एक वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु को नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण और रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 71 वर्षीय पल्लेगामा हेमारथाना थेरो को कोलंबो के एक निजी अस्पताल से हिरासत में लिया गया। यह मामला सामने आने के बाद देशभर में धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही और बाल सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आरोपी भिक्षु को अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। फिलहाल उन्हें मेडिकल निगरानी के तहत जेल अस्पताल में रखा गया है।
धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तित्व
पल्लेगामा हेमारथाना थेरो श्रीलंका के बौद्ध समुदाय में बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं। वे अनुराधापुरा क्षेत्र के मुख्य पुजारी हैं और देश के आठ प्रमुख पवित्र बौद्ध स्थलों के संरक्षक के रूप में भी उनकी पहचान रही है।
अनुराधापुरा को UNESCO विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है और यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में गिना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हेमारथाना थेरो उस पवित्र वृक्ष के भी संरक्षक थे, जिसे भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति वाले बोधि वृक्ष की शाखा से विकसित माना जाता है।
जांच के दौरान सामने आया कथित शोषण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता वर्तमान में 15 वर्ष की है। मार्च 2026 में नाबालिग के कथित अपहरण और अवैध हिरासत से जुड़े मामले की जांच के दौरान पुलिस को लंबे समय से चल रहे कथित यौन शोषण की जानकारी मिली।

इसके बाद लड़की को सरकारी संरक्षण केंद्र में भेजा गया, जहां उससे पूछताछ और काउंसलिंग की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी भिक्षु ने वर्ष 2022 के दौरान अनुराधापुरा के एक मंदिर परिसर में कई बार कथित रूप से लड़की का यौन शोषण किया।
युवती की मां भी हिरासत में
मामले में एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने पीड़िता की मां को भी हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक महिला पर आरोप है कि उसने कथित शोषण को छिपाने और आरोपी की मदद करने में भूमिका निभाई।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। फिलहाल पुलिस ने मामले से जुड़े कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
बाल संरक्षण संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आरोपी का नाम सामने आने के बावजूद तुरंत गिरफ्तारी नहीं की गई।
कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि आरोपी की धार्मिक और सामाजिक हैसियत के कारण जांच प्रक्रिया धीमी रही। बाद में अनुराधापुरा के मुख्य मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक भिक्षु को हिरासत में रखने का आदेश दिया।
श्रीलंका में बढ़ी धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही की मांग
इस घटना के बाद श्रीलंका में धार्मिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया और नागरिक संगठनों ने मांग की है कि धार्मिक पदों पर बैठे प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और बाल अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी चिंता
बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में होने वाले कथित शोषण के मामलों को अक्सर सामाजिक दबाव और प्रतिष्ठा के कारण दबा दिया जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र जांच और कानूनी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
UNESCO से जुड़े धार्मिक स्थलों का नाम इस विवाद में आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।








