रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकट पर राजनीति तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी की अपील पर साधा निशाना

रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर

Narendra Modi ने तेलंगाना से देश को संबोधित करते हुए जनता से अपील की कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए लोग फिर से कोरोना काल जैसी सावधानियां अपनाएं। 

मुंबई: भारत में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की जनता से की गई अपील अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से ईंधन की बचत करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और विदेशी मुद्रा के संरक्षण पर ध्यान देने की अपील की थी। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

इसी कड़ी में Priyanka Chaturvedi ने प्रधानमंत्री की सलाह पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है, केवल जनता को “सुझाव” देने से स्थिति नहीं बदलेगी।

क्या कहा था प्रधानमंत्री मोदी ने?

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि मध्य-पूर्व और यूक्रेन में जारी संघर्षों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन संकट और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण भारत सहित कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे “कोरोना काल की तरह” जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं। उन्होंने कहा कि:

  • पेट्रोल और डीजल की बचत करें
  • अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचें
  • सोने की खरीदारी सीमित करें
  • जहां संभव हो, घर से काम करें

सरकार के अनुसार, इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत करने और ऊर्जा खपत कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रियंका चतुर्वेदी का केंद्र सरकार पर हमला

शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद Priyanka Chaturvedi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि सरकार को आर्थिक दबाव से निपटने के लिए प्रभावी नीतियां बनानी चाहिए, लेकिन इसके बजाय जनता को केवल “सुझाव” दिए जा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “रुपया गिर नहीं रहा है, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

वैश्विक संकट का भारत पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से:

  • आयात बिल बढ़ता है
  • महंगाई पर दबाव आता है
  • रुपये पर असर पड़ता है
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है

इसी वजह से सरकार लगातार ऊर्जा संरक्षण और विदेशी खर्च कम करने पर जोर दे रही है। हाल के महीनों में डॉलर की मजबूती के कारण कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव देखा गया है। भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि सरकार का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अन्य कई देशों की तुलना में अधिक स्थिर बनी हुई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार आम जनता पर जिम्मेदारी डाल रही है, जबकि उन्हें आर्थिक सुधारों और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

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