LPU हिंसा मामले में हाई कोर्ट सख्त, पंजाब पुलिस को आरोपितों की गिरफ्तारी और भ्रामक पोस्ट हटाने के निर्देश

LPU हिंसा मामले में हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस को गिरफ्तारी, भ्रामक पोस्ट हटाने और कथित साजिश की जांच के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

चंडीगढ़ में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी हिंसा मामले की जांच पर सवाल उठाए। अदालत ने पंजाब पुलिस को तत्काल गिरफ्तारी, भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और कथित साजिश की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।

चंडीगढ़: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हिंसा से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच और अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया है। अदालत ने आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी, भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के पीछे संभावित साजिश की जांच करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

हाई कोर्ट ने जांच में तेजी लाने के दिए निर्देश

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) हिंसा मामले में पंजाब पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए जांच में जिस स्तर की सतर्कता और तेजी अपेक्षित थी, अब तक की कार्रवाई उससे कम रही है।

अदालत ने पुलिस को आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े खतरों को दूर करने के निर्देश दिए। साथ ही, जांच में संभावित साजिश के पहलू को भी गंभीरता से देखने की जरूरत बताई।

अफवाह से फैली अशांति, करोड़ों की संपत्ति को नुकसान

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने बताया गया कि विश्वविद्यालय से जुड़ी एक कथित घटना को लेकर सोशल मीडिया पर सूचना प्रसारित हुई थी, जिसकी वास्तविकता की पुष्टि नहीं हुई। इस दावे में एक युवती के यौन उत्पीड़न और बाद में आत्महत्या करने की बात कही गई थी।

अदालत ने सवाल उठाया कि जब कथित घटना की पुष्टि नहीं हुई, तो ऐसी जानकारी इंटरनेट पर फैलाने के पीछे क्या उद्देश्य था। उसने इस संभावना की जांच करने पर जोर दिया कि कहीं जानबूझकर अफवाह फैलाकर अशांति पैदा करने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश तो नहीं की गई।

अदालत के समक्ष पेश जानकारी के अनुसार, हिंसा के दौरान पंजाब पुलिस के तीन वाहन जला दिए गए और कई पुलिसकर्मी घायल हुए। लगभग 30 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचने का दावा भी किया गया। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।

साइबर क्राइम जांच और सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई

पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि काउंटर इंटेलिजेंस मामले की जांच में जुटी है और उपलब्ध सूचनाओं की समीक्षा की जा रही है। जांच के तहत तकनीकी आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए अतिरिक्त समय मांगा।

हाई कोर्ट ने काउंटर इंटेलिजेंस के आईजीपी को एडीजीपी साइबर क्राइम मल्होत्रा का शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तत्काल सूचित कर विवादित और भ्रामक पोस्ट हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग भी की गई। हालांकि, अदालत ने फिलहाल पंजाब पुलिस को जांच में सुधार और प्रभावी कार्रवाई का एक और अवसर दिया है।

अदालत ने पुलिस को अगली सुनवाई में पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित है, जिसमें जांच की प्रगति और उठाए गए कदम महत्वपूर्ण रहेंगे।

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