अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा युद्धविराम के ऐलान के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर बिजली संयंत्र को निशाना बनाने का आरोप लगाया। यूक्रेन ने रूस के समान कदम उठाने पर युद्धविराम का समर्थन करने की बात कही।
कीव: यूक्रेन और रूस के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दोनों देशों के बीच ऊर्जा युद्धविराम होने का दावा किया था। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि इस घोषणा के तुरंत बाद रूस ने यूक्रेन के एक बिजली संयंत्र को निशाना बनाया। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस को भी समान कदम उठाने होंगे।
इस बीच, क्रेमलिन ने किसी औपचारिक समझौते की स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। रूस की ओर से कहा गया है कि संपर्क जारी हैं और इस विषय पर कुछ कहने की स्थिति आने पर जानकारी दी जाएगी। ऐसे में ट्रंप के घोषित ऊर्जा युद्धविराम की वास्तविक स्थिति और उसके दायरे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद भी हमले जारी रहने का आरोप
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पोलैंड की राजधानी वारसॉ में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें कथित ऊर्जा युद्धविराम के बारे में मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन इस व्यवस्था का पालन करने के लिए तैयार है, बशर्ते रूस भी ऐसा करे।
जेलेंस्की के मुताबिक, ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद रूस ने खार्किव क्षेत्र में एक संयंत्र पर हमला किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की सोशल मीडिया पोस्ट का संदर्भ देते हुए तंज कसा कि ऐसा लगता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट नहीं पढ़ते।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब यूक्रेन में सर्दियों से पहले ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनी हुई है। रूस के हमलों से बिजली उत्पादन, गैस सुविधाओं और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों को होने वाला नुकसान आम नागरिकों की बिजली और गर्मी की जरूरतों को प्रभावित कर सकता है।
खार्किव, दोनेत्स्क और जापोरिज्जिया में बिजली आपूर्ति प्रभावित
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को यूक्रेन के खार्किव, दोनेत्स्क और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में रूसी हमलों से ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचने के बाद बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
खार्किव क्षेत्र में गोलाबारी के कारण पांच लोग घायल हुए। हमले में गैस उत्पादन से जुड़ी एक सुविधा को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई। इन घटनाओं ने ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के प्रस्ताव की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य आक्रमण शुरू किया था। इसके बाद से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को लगातार निशाना बनाए जाने की खबरें आती रही हैं। सर्दियों के मौसम में ऐसे हमलों का असर विशेष रूप से गंभीर हो सकता है, क्योंकि बिजली और हीटिंग की जरूरत बढ़ जाती है।
हालांकि, अलग-अलग हमलों की परिस्थितियों और नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों तथा विश्वसनीय समाचार एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्टों को देखना आवश्यक है।
क्या रूस और यूक्रेन के बीच वास्तव में हुआ ऊर्जा समझौता?
ट्रंप ने ऊर्जा युद्धविराम की घोषणा की, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच इसकी शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है। यूक्रेन का कहना है कि वह इस प्रस्ताव का पालन करने के लिए तैयार है, यदि रूस भी अपने ऊर्जा हमले रोकता है। दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस विषय पर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में पेस्कोव ने कहा कि संपर्क जारी हैं और जब इस मामले में बताने के लिए कुछ होगा, तो जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि रूस केवल अस्थायी युद्धविराम के बजाय स्थायी शांति चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पेस्कोव ने यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए 60 दिनों के युद्धविराम की जेलेंस्की की मांग के संदर्भ में भी रूस के पुराने रुख को दोहराया।
इस स्थिति से स्पष्ट है कि ऊर्जा युद्धविराम की घोषणा और दोनों पक्षों के बीच औपचारिक रूप से सहमत शर्तों में अंतर हो सकता है। समझौते की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दोनों देशों की आधिकारिक घोषणाओं और उसके दायरे की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
रिफाइनरी के बदले रिफाइनरी तक सीमित हो सकता है समझौता
अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में रूस और यूक्रेन की तेल रिफाइनरियों को एक-दूसरे के हमलों से बचाने पर जोर हो सकता है। इसे रिफाइनरी के बदले रिफाइनरी समझौते के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि, BBC ने स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।

यदि समझौता केवल तेल रिफाइनरियों तक सीमित रहता है, तो बिजली संयंत्रों, बिजली ग्रिड और ताप ऊर्जा संयंत्रों को इससे सुरक्षा मिलने की गारंटी नहीं होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की एकमात्र तेल रिफाइनरी क्रेमेनचुक में स्थित है। यह पूर्ण पैमाने पर युद्ध की शुरुआत में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी और अप्रैल 2022 से परिचालन में नहीं थी। इसके विपरीत, रूस के पास कई चालू रिफाइनरियां हैं, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ऐसी स्थिति में, यदि समझौता केवल रिफाइनरियों तक सीमित रहता है, तो दोनों देशों को मिलने वाला लाभ समान नहीं हो सकता। यह आकलन प्रस्तावित व्यवस्था की रिपोर्टिंग पर आधारित है, न कि किसी पुष्ट समझौते की अंतिम शर्तों पर।
ट्रंप रूस के तेल ढांचे पर यूक्रेनी हमले रोकने के पक्ष में
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप यूक्रेन से रूस के तेल ढांचे पर हमले रोकने का आग्रह कर रहे हैं। इसका संबंध रूस से डीजल की आपूर्ति के लिए हाल में किए गए एक समझौते से बताया गया है, जिसके तहत अमेरिका और वैश्विक बाजार को डीजल उपलब्ध कराया जाना है।
तेल रिफाइनरियों और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने से ईंधन आपूर्ति तथा ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले असर को सीमित करने की संभावना हो सकती है। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था के आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि समझौता किन सुविधाओं पर लागू होता है और उसका पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।
इस पूरे मामले में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि ट्रंप ऊर्जा युद्धविराम की घोषणा के साथ रूस और यूक्रेन के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यदि दोनों पक्ष इसकी शर्तों पर सहमत नहीं होते हैं, तो घोषणा का जमीन पर असर सीमित रह सकता है।
यूरोप ने प्रभावी युद्धविराम की मांग की
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि यूरोप ऊर्जा युद्धविराम का स्वागत करेगा, जब वह वास्तव में प्रभावी होगा। उन्होंने अमेरिका से आवश्यक प्रतिबंध लागू करने की दिशा में कदम उठाने का भी आग्रह किया, ताकि युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा सके।
यूरोपीय देशों के लिए यूक्रेन की ऊर्जा सुरक्षा महत्वपूर्ण है। लगातार हमलों से न केवल यूक्रेन के नागरिकों को परेशानी होती है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
इस बीच, कीव के निवासियों ने भी किसी नए युद्धविराम को लेकर सतर्कता जताई। समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में 45 वर्षीय शिक्षिका केसिनिया ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप किस तरह के युद्धविराम की बात कर रहे हैं और लोगों को जमीन पर इसका असर महसूस नहीं हो रहा।
37 वर्षीय सरकारी कर्मचारी वीरा ने भी कहा कि पहले युद्धविराम और संघर्ष रोकने की घोषणाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद गोलाबारी जारी रही। उनके बयान से पता चलता है कि आम नागरिक किसी भी नई घोषणा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
ऊर्जा युद्धविराम की सफलता अब भी अनिश्चित
ट्रंप के ऐलान के बाद यूक्रेन में हमले जारी रहने के आरोप और रूस की ओर से स्पष्ट पुष्टि नहीं होने के कारण ऊर्जा युद्धविराम की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। जेलेंस्की ने पारस्परिक रूप से हमले रोकने की इच्छा जताई है, जबकि रूस ने कहा है कि बातचीत जारी है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की स्पष्ट शर्तों पर सहमत होते हैं। इसके साथ ही, किसी समझौते के दायरे, निगरानी व्यवस्था और उल्लंघन की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों पर स्पष्टता भी जरूरी होगी।
फिलहाल, सर्दियों से पहले यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा और रूस-यूक्रेन युद्ध को कम करने के कूटनीतिक प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए प्रमुख चिंता बने हुए हैं।









