उत्तराखंड की निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सोमवार को फिर भूस्खलन हुआ। पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर मलबा गिरा। निर्माण कंपनी ने इसे सामान्य घटना बताते हुए किसी खतरे से इनकार किया है।
उत्तरकाशी: यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सोमवार को एक बार फिर भूस्खलन की घटना सामने आई। पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर मलबा गिरने से सुरंग के भीतर मलबा फैल गया। निर्माण कंपनी ने घटना को सामान्य बताते हुए किसी गंभीर खतरे से इनकार किया है। इसी सुरंग में नवंबर 2023 में 41 श्रमिक भूस्खलन के बाद 17 दिनों तक फंसे रहे थे।
डेढ़ किलोमीटर अंदर गिरा मलबा
चारधाम सड़क परियोजना के तहत यमुनोत्री हाईवे पर बनाई जा रही सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सोमवार को फिर भूस्खलन की सूचना सामने आई। पोलगांव-बड़कोट छोर से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर मलबा गिरने के बाद सुरंग के भीतर मलबा फैल गया।

घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद सुरंग की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। निर्माणाधीन सुरंग में पहले भी भूस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए ताजा घटना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है।
हालांकि निर्माण कंपनी नवयुगा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री राम ने किसी गंभीर खतरे से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर करीब 1300 मीटर की दूरी पर कुछ मलबा गिरा है और उसे हटाने का काम किया जा रहा है।
2023 में 41 श्रमिक फंसे थे
सिलक्यारा सुरंग नवंबर 2023 में बड़े हादसे के बाद देशभर में चर्चा में आई थी। उस समय सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर भारी भूस्खलन हुआ था। इसके कारण निर्माण कार्य में लगे 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे।
श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। इसके बाद सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। हादसे के बाद सुरंग की सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे थे।
ताजा घटना के बाद एक बार फिर निर्माणाधीन सुरंग में मलबा गिरने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि कंपनी ने वर्तमान स्थिति को चिंताजनक नहीं बताया है।
2018 में शुरू हुआ था सुरंग का निर्माण
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। इसे वर्ष 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी।
वर्ष 2024 में सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार किया गया। फिलहाल इसके करीब 90 प्रतिशत सिविल कार्य पूरे होने की जानकारी दी गई है। सुरंग को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
करीब 4.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग उत्तराखंड में निर्माणाधीन सड़क सुरंगों में सबसे लंबी बताई गई है। चारधाम सड़क परियोजना के लिहाज से भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
फिलहाल मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। निर्माण कंपनी ने घटना को सामान्य बताते हुए किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है, जबकि सुरंग में पहले हो चुकी भूस्खलन की घटनाओं के कारण सुरक्षा पर नजर बनी हुई है।












